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संदेश
( 31 Articles )
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प्रार्थनाएं
( 5 Articles )
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साक्षी
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रचनाएं
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ट्रैक्ट्स
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सात घातक पाप
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मसीही विधियां
( 25 Articles )
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संदेश रूपरेखा
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मसीही विधियों से संबंधित संदेश
( 14 Articles )
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दस प्रारंभिक मिशनरियों की जीवनियां
( 10 Articles )
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विभिन्न अवसरों से संबंधित बाइबिल सन्दर्भ
( 5 Articles )
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आराधना में प्रयुक्त होने वाले प्रचलित कोरस
( 8 Articles )
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डॉ. विजय लाल की पुस्तक - धूल की नियति
( 26 Articles )
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यीशु मसीह के चालीस दृष्टान्त
( 40 Articles )
परमेश्वर की आशीष एवं अनुग्रह के फलस्वरूप यह द्वितीय संस्करण आपके लिए प्रस्तुत है। पाठकों के प्रेम, प्रोत्साहन एवं प्रार्थनाओं से परमेश्वर ने मेरे परिश्रम को आशीषित किया है। मात्र एक वर्ष की अल्प अवधि में ही इस पुस्तक की लोकप्रियता एवं बढ़ती हुई मांग की पूर्ति के लिए इसका द्वितीय संस्करण अनिवार्य हो गया था।
इस पुस्तक को सभी प्रमुख हिन्दी भाषीय धार्मिक अगुवों ने सराहते हुए प्रचार एवं मसीही शिक्षा के क्षेत्र में उपयुक्त एवं उपयोगी निरूपित किया है। उनकी अनुशंसा के कुछ अंश इस संस्करण में संलग्न किये जा रहे हैं जो एक तरह से इस पुस्तक की प्रमुखता पर मुहर लगाते हैं। उनकी प्रशंसा एवं प्रोत्साहन के लिए मैं हृदय से उनकी आभारी हूं।
बहुत से बाइबिल कॉलेजों एवं सेमीनरीज में यह पाठ्यपुस्तक के रूप में स्वीकार कर शिक्षण के काम में लायी जा रही है। सण्डे स्कूल के शिक्षक भी इसका भरपूर उपयोग कर रहे हैं। प्रातः मनन के लिए बहुत से परिवारों में एवं मसीही संस्थाओं में इसे पढ़ा जाता है। प्रचारकों एवं पासबानों के लिए भी इसमें 40 संदेश निहित हैं जो कलीसियाओं में आत्मिक उन्नति हेतु सार्थक साबित हो रहे हैं।
इन सब बातों से मुझे सबसे बढ़कर इस बात का संतोष है कि मेरे आराध्य, मेरे प्रभु यीशु मसीह ने मेरी पुस्तक के रूप में यह भेंट स्वीकार की है और उसे अपनी गवाही का एक माध्यम बनाया है।
मेरी प्रार्थना है और साथ ही आशा भी है कि पाठकगण इस पुस्तक के माध्यम से प्रभु यीशु के आव्हान को सुन सकेंगे और न सिर्फ स्वयं किन्तु अपने संपर्क के मसीही सेवकों एवं अगुवों को भी इस पुस्तक की जानकारी देकर अनुगृहीत कर सकेंगे।
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उपासना पारिवारिक आराधना की पुस्तक
( 49 Articles )
उपासना- 2 पारिवारिक आराधना की पुस्तक -लेखक डॉ. विजय लाल मिड इन्डिया क्रिश्चियन सर्विसेज़, दमोह- म.प्र. 470-661 प्रस्तावना उपासना – 2, डॉं. विजय लाल द्वारा जीवन के अन्तिम दिनों में लिखी पुस्तक है। मृत्यु से संघर्ष करते हुए वे ये संदेश लिखा सके- जो उनकी आस्था और सम्पूर्ण जीवन-दर्शन की अभिव्यक्ति है।
इस संसार से विदा होने के कुछ ही दिनों पूर्व, तीव्र पीड़ा में, उन्होंने अन्तिम दो सन्देश लिखवाए- ‘अंधकार के उपहार’ और ‘स्वप्नों को साकार बनाना’- मृत्यु को सामने पाकर भी वे अपने विश्वास में दृढ़ रहे और जो सिखाया वैसा जी कर दिखाया। उपासना- 1, अत्यन्त लोकप्रिय हुई है और मेरा विश्वास है कि उपासना- 2 के अध्ययन द्वारा आप अवश्य आशीषित होंगे।
इस पुस्तक को तैयार करने में श्रीमति पी. वी. लाल, डॉ. श्रीमती रमोला हेनरी, श्रीमती पौलीना ए.सिंग तथा श्री ओ. पी. त्रिपाठी ने सहयोग प्रदान किया, जिनके प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हैं।
राजकमल डेविड लाल 19 मई 1995 दमोह (म.प्र)
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उपासना को अर्पित
( 100 Articles )
लेखिका श्रीमती शीला लाल मिड इण्डिया क्रिश्चियन सर्विसेज़ दमोह (म.प्र.)
दो शब्द मसीहियत की अभिव्यक्ति संस्कृति और संवेदनशील सोच विचार के आधार पर भारतीय हो तथा एक सामान्य आम मसीही भी बाइबिल के अथाह भण्डार से कुछ पाकर उसे दूसरों में बांट सके इसी उद्देश्य से इस पुस्तक की रचना की गयी है।
मैंने बाइबिल के एक पद को लेकर उसका शीर्षक लिखा है और उस एक विचार को ही इस प्रकार अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है कि वह न सिर्फ़ आपके हृदय को स्पर्श करें अपितु उस पर हमेशा के लिए अंकित हो जाये ताकि आप इसे अपने अनुभवों से उचित अवसरों पर बेझिझक विकसित कर व्यक्त कर सकें, उस पर चर्चा कर सकें और स्वयं में आध्यात्मिक रूप से उन्नत हो सकें।
मेरे इस प्रयास में मेरे पति श्री आर.डी. लाल, मेरी सास स्वर्गीय डॉ. विजय लाल जी की धर्म पत्नी श्रीमती पी.वी. लाल, मेरे माता पिता डॉ. एवम् श्रीमती डी.ई. हेनरी, डॉ. अजय लाल एवं श्रीमती इन्दुलाल ने मेरा अथक उत्साहवर्धन किया है। पाण्डुलिपि की मुद्रक प्रति तैयार करने में श्री ए.के. बजाज एवम् श्री आर.एस. टुडू का सम्पूर्ण सहयोग मुझे मिला है। इन सब के प्रति मैं हृदय से आभारी हूं और सबसे बढ़कर परम पिता परमेश्वर के प्रति मेरा हृदय धन्यवाद से भरा है जिसके प्रेमपूर्ण आश्चर्यकर्मों का अनुभव मैंने अपने जीवन में किया है और जिसकी सेवा करने के अवसर को मैं अपने जीवन का वरदान मानती हूं।
विचारों की अभिव्यक्ति अत्यन्त सरल शब्दों में है इनमें से अधिकांश विचार मिड इण्डिया क्रिश्चियन सर्विसेज़ के कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व लिए गये मेरे मनन (devotions) हैं। आप इसे पढ़े और इससे प्रभु में और समृद्ध हों यही मेरी कामना है और प्रार्थना भी।
शीला लाल
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आधारशिला
( 312 Articles )
भूमिका परमेश्वर का वचन सामर्थी है। वह दोधारी तलवार के समान पैना और हृदय तक पहुंचने वाला है। वचन की सामर्थ्य से ही परमेश्वर ने सृष्टि की सृजना की। मात्र परमेश्वर के वचन से ही सृष्टि के सारे तत्व अस्तित्व में आ गए।
परमेश्वर का वचन जीवित है, आज भी उसमें वही सामर्थ्य है जो सृष्टि की सृजना के समय थी। किन्तु इस समय में परमेश्वर ने हम मनुष्यों को गौरव प्रदान किया है कि हम उसके वचन को दूसरों तक पहुंचाने का माध्यम बनें। आवश्यकता इस बात की है कि हम वचन को इस प्रकार प्रस्तुत करें कि वह प्रभावशाली हो और सामर्थ्य के साथ प्रचारा जाए। इसके लिये एक प्रमुख बात है वह है तैयारी। वचन को प्रचार करने के पूर्व प्रार्थना, उसका गहन अध्ययन, पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन में चिंतन-मनन को एक दिशा प्राप्त हो सकती है, आपके प्रचार को और भी सशक्त बनाया जा सकता है, और आपकी सेवा और भी प्रभावी हो सकती है।
यह किसी शिल्पकर्मी के लिये ईट, पत्थर, रेत और सीमेंट के समान है, वह इनकी मदद से एक आलीशान भवन बना सकता है। हमारी प्रार्थना है कि ये संदेश रूपरेखाएं लोगों के हृदय तक पहुंच सकें और परमेश्वर की सामर्थ्य से उनके जीवन में परिवर्तन आ सके और वे अपने परिवर्तित जीवनों से औरों में भी परिवर्तन ला सकें। विश्वास करें परमेश्वर के वचन की ज़िन्दा सामर्थ्य हमारे जीवनों, परिवारों, कलीसियाओं और राज्यों को बदल सकती है।
परमेश्वर के प्रति इसी अटल विश्वास और समर्पण के साथ यह पुस्तक आपको सादर प्रेषित है। सेन्ट्रल इंडिया क्रिश्चियन मिशन परिवार
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बाइबिल टीका - मत्ती रचित सुसमाचार
( 30 Articles )
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उपासना (1)
( 100 Articles )
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वेकेशन बाइबिल स्कूल पाठ्यक्रम
( 52 Articles )
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सण्डेस्कूल का मासिक पाठ्यक्रम
( 12 Articles )
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सण्डेस्कूल पाठ्यक्रम के विभिन्न विषय
( 15 Articles )
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नये नियम की कलीसिया और आप
( 34 Articles )
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विश्वास, आनन्द और महिमा
( 46 Articles )
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