| धनवान व्यक्ति और लाजर |
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| Written by डॉ. श्रीमती इन्दु लाल | |
| Saturday, 02 September 2006 18:00 | |
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संडे स्कूल साहित्य श्रृंखला प्रस्तावना – फ़रीसियों के हृदय में सामाजिक रूप से निचले तबके के लोगों के प्रति कोई संवेदनशीलता नहीं थी। वे स्वयं को जन्म के, पदके, पैसों के, शिक्षा के आधार पर धर्मी ठहराते थे किन्तु वे किसी ज़रूरतमंद की मदद नहीं करना चाहते थे। याकूब की पत्री के चौथे अध्याय के सत्रहवें पद में लिखा है कि – ‘‘जो कोई भलाई करना जानता है पर नहीं करता उसके लिए यह पाप है।’’ उनके ऐसे ही व्यवहार का खुलासा करने के लिए प्रभु यीशु मसीह ने यह दृष्टांत बताया। दृष्टांत के पात्र – धनी व्यक्ति, शास्त्री, फ़रीसी और सामाजिक रूप से ऊंचे दर्जे के लोग। लाजर – गरीब, निम्न जाति और सामाजिक रूप से नीचे दर्जे के ज़रूरतमंद लोग को प्रगट करते हैं। विषय वस्तु – इस दृष्टांत में एक बहुत धनवान व्यक्ति था, वह बड़े घर में रहता था। सुख से रहता और अपने दिन दावतों में बिताया करता था। उसके घर के सामने ही एक अपंग, लाचार व्यक्ति लाजर को छोड़ दिया जाता था। लाजर इधर–उधर घूम–फिरकर भीख नहीं मांग सकता था, क्योंकि वह एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए दूसरों की दया एवं सहारे पर आश्रित था उसके सम्पूर्ण शरीर पर घाव थे जिन्हें कुत्ते आकर चाटते थे। भूख, दर्द एवं पीड़ा ही उसके साथी बन चुके थे। उसकी दृष्टि निरंतर धनवान की शाही दावतों से बचे उन टुकड़ों पर लगी रहती थी जिन्हें उसके नौकर कुत्तों या भिखारियों को दे देते थे या कचरा समझकर बाहर फेंक देते थे। कुछ समय बाद दोनों की मृत्यु हुई। लाजर स्वर्ग गया और धनवान नरक। धनवान ने लाजर को इब्राहीम की गोद में देखा तो उसे बनाम पहचान लिया। उसने इब्राहीम को पुकार कर कहा लाजर को भेज जिससे वह अपनी उंगली पानी में भिगोकर मेरी जीभ को ठण्डा करे। इब्राहीम ने लाजर को धनवान के पास नहीं जाने दिया। धनवान ने पुन: इब्राहीम को पुकारा और कहा लाजर को मेरे भाइयों के पास भेज। मेरे 5 भाई हैं वे समय रहते लाजर की सुनें और मन फिरायें और इस नरक की पीड़ा से बचें। इब्राहीम ने उससे कहा उनके पास मूसा और भविष्यवक्ताओं की पुस्तकें हैं, वे यदि उनकी नहीं सुनते तो फिर कोई मरे हुओं में से जी भी उठे तो भी उसकी नहीं मानेंगे। इस बात के उदाहरण हमें बाइबिल में मिलते हैं। (1) राजा शाऊल ने एन्दोर में भूतसिद्धि करने वाली स्त्री से शमूएल की आत्मा को बुलवाया किन्तु शमूएल की बातें सुनकर भी शाऊल ने मन नहीं फिराया। (1 शमूएल 28:7–25) (2) मरियम और मार्था के भाई लाजर को जिसे मरे 4 दिन हो चुके थे, प्रभु यीशु मसीह ने कब्र से जिन्दा कर निकाला किन्तु शास्त्री और फ़रीसियों ने मन नहीं फिराया किन्तु उसे मारने की युक्ति ढूंढने लगे। (यूहन्ना 12:10) (3) याईर की लड़की को जिन्दा कर दिया फिर भी शास्त्री और फ़रीसियों ने प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास नहीं किया। (मरकुस 5:21–24, 35–43) शिक्षाएं – (1) धन अपने आप में बुरा नहीं बल्कि यह परमेश्वर की आशीष है। इसका हमें योग्य भण्डारी के रूप में उपयोग करना है, दूसरों की आवश्यक जरूरतों के प्रति संवेदनशील रहना है। स्वार्थ से परे रहना है। (2) इस जीवन में हमें परमेश्वर को और उसके जीवित वचन (बाइबिल) को आदर देना है। उसकी शिक्षाओं के अनुसार जीना है। कितने इस संसार में पैदा होते हैं, उन्हें एक न एक दिन मरना है, बात है तैयारी की, परमेश्वर से सम्बन्ध की, आत्मावलोकन की जिसका मूल्यांकन हमें अभी करना है। (3) कुछ लोग दर्शन की और अन्य बड़े आश्चर्यजनक चिन्हों की प्रतीक्षा करते हैं किन्तु इस दृष्टांत से प्रभु यीशु मसीह ने स्वयं यह स्पष्ट किया कि बाइबिल ही सब प्रश्नों का अन्तिम उत्तर (ULTIMATE ANSWER) है। उसका अध्ययन करें उसके अनुसार परमेश्वर के मार्ग पर चलें, उसकी शिक्षाओं के अनुसार जियें। श्रीमति इन्दुलाल
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| Last Updated on Thursday, 20 March 2008 18:37 |



