| विवाह से संबंधित संदेश – 2 |
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| Written by डॉ. अजय लाल/ डॉ. इन्दु लाल | |||
| Friday, 28 March 2008 17:23 | |||
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संदर्भः भजन संहिता 127:1 भूमिकाः- मसीही परिवार के निर्माण की बात घर बनाने से किन्हीं मायनों में समान है। विवाह के अवसर पर जब हम एक परिवार की स्थापना की बात करते हैं तो हमको घर बनाने से जुड़ी हुई इन बातों की ओर ध्यान देना है जो कि एक मसीही परिवार को बनाने के लिए भी आवश्यक हैं। 1. किसी भी घर के निर्माण की पहली बात उसकी बुनियाद होती है। उसी प्रकार मसीही परिवार का आधार परमेश्वर हैः- परिवार में परमेश्वर का स्थान प्रथम होना चाहिए। परमेश्वर ने जब मूसा को दस आज्ञाएं दीं तो उसमें पहली आज्ञा थी, ‘‘तू मुझे छोड़ दुसरों को ईश्वर करके न मानना।’’ परिवार में परमेश्वर को प्रथम स्थान देने का अर्थ है प्रतिदिन सुबह प्रार्थना के द्वारा उसे पहला स्थान देना। प्रत्येक सप्ताह के प्रथम दिन कलीसिया के साथ सहभागिता करना। प्रत्येक माह अपनी आमदनी का पहला भाग परमेश्वर को देना। जब परिवार के प्रत्येक आयाम में परमेश्वर का स्थान प्रथम होगा तो उससे यह प्रकट होगा कि उस परिवार की बुनियाद परमेश्वर है। लिखा है, ‘‘यदि घर को यहोवा ही न बनाए, तो बनाने वाले व्यर्थ परिश्रम करते हैं। जब तक यहोवा ही नगर की रक्षा न करें, तो पहरेदार का जागना व्यर्थ है।’’ (भजन संहिता 127:1) 2. घर के निर्माण की दूसरी प्रमुख बात उसकी मज़बूत दीवारें होती हैं। उसी प्रकार मसीही परिवार की दीवारों की मज़बूती के लिए प्रेम ज़रूरी हैः- घर की बुनियाद रखने के बाद दीवारें खड़ी होती हैं। दीवार चाहे पत्थर की हो या ईट की इनकी मज़बूती के लिए सीमेंट ज़रूरी होता है उसी तरह मसीही परिवार में स़बंधों की दीवारों की मज़बूती के लिए प्रेम ज़रूरी होता है। 1कुरिन्थियों 13:4-7 में लिखा है ‘‘प्रेम धीरजवन्त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बढ़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। कुकर्म से आनन्दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्दित होता है। वह सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।’’ प्रेम ही व्यक्ति को जोड़ता है, प्रेम ही व्यक्ति को बढ़ाता है, उसे सम्भालता है, संवारता है, टूटने से बचाता है। प्रेम ही व्यक्ति की शक्ति होता है। जिस प्रकार पानी सीमेंट को मज़बूती देता है उसी प्रकार प्रेम के साथ क्षमा आवश्यक है। क्षमा के बिना कोई भी संबंध मज़बूत नहीं हो सकता। 3. घर के निर्माण की तीसरी प्रमुख बात घर की छत होती है, उसी प्रकार मसीही परिवार की छत वचन होना चाहिएः- घर की छत व्यक्ति को सुरक्षा देती है। छत उसे धूप, बारिश, आंधी, तूफान से बचाती है। व्यवस्थाविवरण 6:6-8 में लिखा है ‘‘और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें; और तू इन्हें अपने बालबच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना और इन्हें अपने हाथ पर चिन्हानी करके बांधना, और ये तेरी आंखों के बीच टीके का काम दें।’’शैतान कठिनाईयों, दुःख, पीड़ा, विछोह, परीक्षाओं और आलोचना के द्वारा परिवार पर आक्रमण करेगा परन्तु वचन हमारे विरोधी शैतान से हमको बचाएगा। इस कारण परिवार में प्रतिदिन वचन का पठन हो। नीतिवचन 13:13 में लिखा है ‘‘जो वचन को तुच्छ जानता, वह नाश हो जाता है, परन्तु आज्ञा के डरवैय्ये को अच्छा फल मिलता है।’’ 4. घर की सुरक्षा के लिए दरवाज़े होते हैं उसी प्रकार मसीही परिवार में सीमाएं दरवाज़ों के समान होती हैं:- दरवाज़े कमरों की, घर की सीमा पर होते हैं। जो घर की सीमाओं के रूप में कार्य में करते हैं, उसी प्रकार मसीही परिवार के लिए भी परमेश्वर ने कुछ सीमाएं बनाई हैं। नीतिवचन 12:4 में पत्नि के लिए लिखा है ‘‘भली स्त्री अपने पति का मुकुट है, परन्तु जो लज्जा के काम करती वह मानो उसकी हड्डियों के सड़ने का कारण होती है।’’ नीतिवचन 6:27-29 में पति के लिए लिखा है ‘‘क्या हो सकता है कि कोई अपनी छाती पर आग रख ले; और उसके कपड़े न जलें? क्या हो सकता है कि कोई अंगारे पर चले, और उसके पांव न झुलसें? जो पराई स्त्री के पास जाता है, उसकी दशा ऐसी है; वरन् जो कोई उसके छुएगा वह दण्ड से ने बचेगा।’’ इस कारण मसीही परिवार की मज़बूती के लिए आवश्यक है कि पति पत्नि एवं परिवार का प्रत्येक सदस्य इन सीमाओं के भीतर रहकर जीवन में आगे बढ़े। 5. घर की सुन्दरता दीवारों पर किए गए रंगों से बढ़ती है उसी प्रकार मसीही परिवार की सुन्दरता परिवार में आत्मा के फलों से प्रदर्शित होती हैः- एक सुन्दर मसीही परिवार में आत्मा के फलों का पाया जाना ज़रूरी है। ये आत्मा के फल हैं; ‘‘आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। और जो मसीह यीशु के है, उन्होंने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।’’ (गलतियों 5:22-24) मसीही परिवार में प्रत्येक समय अच्छी बातों, अच्छे विचारों, अच्छे कार्यो की ओर ध्यान होना चाहिए। क्योंकि पेड़ अपने फलों के द्वारा पहचाना जाता है। फिलिप्पयों 4:8 में लिखा है ‘‘निदान, हे भाइयो, जो जो बातें सत्य हैं; और जो जो बातें आदरणीय है; और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सद्गुण और प्रशंसा की बातें है उन्हीं पर ध्यान लगाया करो।’’ निष्कर्षः- जब आज वर और वधु विवाह के इस बंधन में बांधे गए हैं। इनके द्वारा एक मसीही परिवार की स्थापना आज हुई है। अतः ये पाचों बातें इनके परिवार में पाई जाएं ताकि इस सुन्दर मसीही परिवार को देखकर लोग परमेश्वर की आशीषों एवं उपस्थिति का अनुभव कर सकें।
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| Last Updated on Friday, 28 March 2008 17:39 |



