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आलस्‍य PDF Print E-mail
Written by डॉ. श्रीमती इन्‍दु लाल   
Thursday, 11 October 2007 18:22

विवेचना : -

 

आलस्‍य ऐसी निष्क्रियता है जो व्‍यक्ति को उसकी ज़ि‍म्‍मेदारियों, परिश्रम तथा आत्‍म अनुशासन से वंचित करती है और उनके प्रति लापरवाह होने को प्रेरित करती है।

 

आलस्‍य या सुस्‍ती एक घातक पाप है। यह समय बर्बाद करती है। यह व्‍यक्ति को परमेश्‍वर तथा अन्‍य मनुष्‍यों के प्रति ज़ि‍म्‍मेदारियों को पूरा नहीं करने देती। आलस्‍य जीवन को गंभीरता, एकाग्रता और परिश्रम से अलग कर विनाश की ओर पहुंचाता है।

 

आलसी मनुष्‍य को किन गुणों के आधार पर पहचानें?

1. परिश्रम न करने वाला :

 

‘‘कामकाजी लोग प्रभुता करते हैं, परन्‍तु आलसी बेगारी में पकड़े जाते हैं।’’

(नीतिवचन 12:24)

 

2. बहाने बनाने में निपुण :

 

‘‘हे आलसी, च्‍यूंटियों के पास जा; उनके काम पर ध्‍यान दे, और बुद्धि‍मान हो। उनके न तो कोई न्‍यायी होता है, न प्रधान, और न प्रभुता करने वाला, तौभी वे अपना आहार धूपकाल में संचय करती हैं, और कटनी के समय अपनी भोजन-वस्‍तु बटोरती हैं। हे आलसी, तू कब तक सोता रहेगा? तेरी नींद कब टूटेगी? कुछ और सो लेना, थोड़ी सी नींद, एक और झपकी, थोड़ा और छाती पर हाथ रखे लेटे रहना, तब तेरा कंगालपन बटमार की नाई और तेरी घटी हथियारबंद के सामन आ पड़ेगी।’’ (नीतिवचन 6:6-11)

 

‘‘आलस से भारी नींद आ जाती है, और जो प्राणी ढिलाई से काम करता, वह भूखा ही रहता है।’’ (नीतिवचन 19:15)

 

‘‘नींद से प्रीति न रख, नहीं तो दरिद्र हो जाएगा।’’ (नीतिवचन 20:13)

 

‘‘आलसी कहता है, कि मार्ग में सिंह है, चौक में सिंह है! जैसे किवाड़ अपनी चूल पर घूमता है, वैसे ही आलसी अपनी खाट पर करवटें लेता है। आलसी अपना हाथ थाली में तो डालता है, परन्‍तु आलस्‍य के कारण कौर मुंह तक नहीं उठाता।’’

(नीतिवचन 26:13-15)

 

‘‘आलसी कहता है, बाहर तो सिंह होगा! मैं चौक के बीच घात किया जाऊंगा।’’ (नीतिवचन 22:13)

 

3. बेगारी और अव्‍यवस्‍था उत्‍पन्‍न करने वाला :

 

‘‘आलस्‍य के कारण छत की कड़ि‍यां दब जाती हैं, और हाथों की सुस्‍ती से घर चूता है।’’ (सभोपदेशक 10:18)

 

‘‘मैं आलस्‍य के खेत के पास से और निर्बुद्धि‍मनुष्‍य की दाख की बारी के पास होकर जाता था, तो क्‍या देखा, कि वहां सब कहीं कटीले पेड़ भर गए हैं; और वह बिच्‍छु पेड़ों से ढंप गई है, और उसके पत्‍थर का बाड़ा गिर गया है।’’ (नीतिवचन 24:30-31)

 

‘‘आलसी मनुष्‍य शीत के कारण हल नहीं जोतता; इसलिये कटनी के समय वह भीख मांगता, और कुछ नहीं पाता।’’ (नीतिवचन 20:4)

 

4. कोरी कल्‍पना करने वाला :

 

‘‘आलसी अपनी लालसा में ही मर जाता है, क्‍योंकि उसके हाथ काम करने से इन्‍कार करते हैं।’’ (नीतिवचन 21:25)

 

‘‘आलसी का प्राण लालसा तो करता है, और उसको कुछ नहीं मिलता, परन्‍तु कामकाजी हृष्‍ट पुष्‍ट हो जाते हैं।’’ (नीतिवचन 13:4)

 

‘‘आलसी अहेर का पीछा नहीं करता, परन्‍तु कामकाजी को अनमोल वस्‍तु मिलती है।’’ (नीतिवचन 12:27)

5. बाधक और निराशा उत्‍पन्‍न करने वाला –

 

‘‘और जब हम तुम्‍हारे यहां थे, तब भी यह आज्ञा तुम्‍हें देते थे, कि यदि कोई काम करना न चाहे, तो खाने भी न पाए। हम सुनते हैं, कि कितने लोग तुम्‍हारे बीच में अनुचित चाल चलते हैं; और कुछ काम नहीं करते, पर औरों के काम में हाथ डाला करते हैं।’’ (2थिस्‍सलुनीकियों 3:10-11)

 

‘‘और जैसी हमने तुम्‍हें आज्ञा दी, वैसे ही चुपचाप रहने और अपना अपना काम काज करने, और अपने अपने हाथों से कमाने का प्रयत्‍न करो।’’ (1थिस्‍सलुनीकियों 4:11)

 

‘‘और इस के साथ ही साथ वे घर घर फिरकर आलसी होना सीखती हैं, और केवल आलसी नहीं, पर बकबक करती रहती और औरों के काम में हाथ भी डालती हैं और अनुचित बातें बोलती हैं।’’ (1तीमुथियुस 5:13)

 

‘‘जो काम में आलस करता है, वह खोनेवाले का भाई ठहरता है।’’ (नीतिवचन 18:9)

 

6. मेहनत से कतराने वाला :

 

‘‘हे आलसी, च्‍यूंटियों के पास जा; उनके काम पर ध्‍यान दे, और बुद्धि‍मान हो। उनके न तो कोई न्‍यायी होता है, न प्रधान, और प्रभुता करने वाला, तौभी वे अपना आहार धूपकाल में संचय करती हैं, और कटनी के समय अपनी भोजन-वस्‍तु बटोरती हैं। हे आलसी, तू कब तक सोता रहेगा? तेरी नींद कब टूटेगी? कुछ और सो लेना, थोड़ी सी नींद, एक और झपकी, थोड़ा और छाती पर हाथ रखे लेटे रहना, तब तेरा कंगालपन बटमार की नाईं और तेरी घटी हथियारबन्‍द के समान आ पड़ेगी।’’ (नीतिवचन 6:6-11)

 

‘‘आलसी मनुष्‍य शीत के कारण हल नहीं जोतता; इसलिये कटनी के समय वह भीख मांगता, और कुछ नहीं पाता।’’ (नीतिवचन 20:4)

 

‘‘आलस से भारी नींद आ जाती है, और जो प्राणी ढिलाई से काम करता, वह भूखा ही रहता है।’’ (नीतिवचन 19:15)

 

‘‘मैं आलसी के खेत के पास से और निर्बु‍द्धि‍मनुष्‍य की दाख की बारी के पास होकर जाता था, तो क्‍या देखा, कि वहां सब कहीं कटीले पेड़ भर गए हैं, और उसके पत्‍थर का बाड़ा गिर गया है। तब मैंने देखा और उस पर ध्‍यानपूर्वक विचार किया; हां मैंने देखकर शिक्षा प्राप्‍त की। छोटी सी नींद, एक और झपकी, थोड़ी देर हाथ पर हाथ रख के और लेटे रहना, तब तेरा कंगालपन डाकू की नाईं, और तेरी घटी हथियारबन्‍द के समान आ पड़ेगी।’’ (नीतिवचन 24:30-34)

 

7. विकास के बदले खोने वाला :

‘‘आलसी अपनी लालसा में ही मर जाता है, क्‍योंकि उसके हाथ काम करने से इन्‍कार करते हैं।’’ (नीतिवचन 21:25)

‘‘क्‍योंकि यह उस मनुष्‍य की सी दशा है जिस ने परदेश को जाते समय अपने दासों को बुलाकर, अपनी सम्‍पत्ति उन को सौंप दी। उस ने एक को पांच तोड़े, दूसरे को दो, और तीसरे को एक; अर्थात् हर एक को उस की सामर्थ्‍य के अनुसार दिया, और तब परदेश चला गया। तब जिस को पांच तोड़े मिले थे, उस ने तुरन्‍त जाकर उन से लेन देन किया, और पांच तोड़े और कमाए। इसी रीति से जिस को दो मिले थे, उस ने भी दो और कमाए। परन्‍तु जिस को एक मिला था, उस ने जाकर मिट्टी खोदी, और अपने स्‍वामी के रूपये छिपा दिए। बहुत दिनों के बाद उन दासों का स्‍वामी आकर उन से लेखा लेने लगा। जिस को पांच तोड़े मिले थे, उस ने पांच तोड़े और लाकर कहा; हे स्‍वामी, तू ने मुझे, पांच तोड़े सौपे थे, देख, मैं ने पांच तोड़े और कमाए हैं। उसके स्‍वामी ने उससे कहा, धन्‍य हे अच्‍छे और विश्‍वासयोग्‍य दास, तू थोड़े में विश्‍वासयोग्‍य रहा; मैं तुझे बहुत वस्‍तुओं का अधिकारी बनाऊंगा अपने स्‍वामी के आनन्‍द में सम्‍भागी हो। और जिस को दो तोड़े मिले थे, उस ने भी आकर कहा; हे स्‍वामी, तू ने मुझे दो तोड़े सौंपे थे, देख मैं ने दो तोड़े और कमाए। उसके स्‍वामी ने उस से कहा, धन्‍य हे अच्‍छे और विश्‍वासयोग्‍य दास, तू थोड़े में विश्‍वासयोग्‍य रहा, मैं तुझे बहुत वस्‍तुओं का अधिकारी बनाऊंगा अपने स्‍वामी के आनन्‍द में सम्‍भागी हो। तब जिस को एक तोड़ा मिला था, उस ने आकर कहा; हे स्‍वामी, मैं तुझे जानता था, कि तू कठोर मनुष्‍य है : तू जहां नहीं छींटता वहां से बटोरता है सो मैं डर गया और जाकर तेरा तोड़ा मिट्टी में छिपा दिया; देख, जो तेरा है, वह यह है। उसके स्‍वामी ने उसे उत्‍तर दिया, कि हे दुष्‍ट और आलसी दास; जब यह तू जानता था, कि जहां मैं ने नहीं बोया वहां से काटता हूं; और जहां मैं ने नहीं छींटा वहां से बटोरता हूं। तो तुझे चाहिए था, कि मेरा रूपया सर्राफों को दे देता, तब मैं आकर अपना धन ब्‍याज समेत ले लेता। इसलिये वह तोड़ा उस से ले लो, और जिस के पास दस तोड़े हैं, उस को दे दो। क्‍योंकि जिस किसी के पास है, उसे और दिया जाएगा; परन्‍तु जिस के पास नहीं है, उससे वह भी जो उसके पास है, ले लिया जाएगा। और इस निकम्‍मे दास को बाहर के अन्‍धेरे में डाल दो, जहां रोना और दांत पीसना होगा।’’ (मत्‍ती 25:14-30; लूका 19:11-27)

8. निराशावादी, नकारात्‍मक चिन्‍तन करने वाला :

 

‘‘आलसी का प्राण लालसा तो करता है, और उसको कुछ नहीं मिलता, परन्‍तु कामकाजी हृष्‍ट पुष्‍ट हो जाते हैं।’’ (नीतिवचन 13:4)

 

‘‘आलसी अपनी लालसा में ही मर जाता है, क्‍योंकि उसके हाथ काम करने से इन्‍कार करते हैं।’’ (नीतिवचन 21:25-26)

 

‘‘आलसी कहता है, बाहर तो सिंह होगा! मैं चौक के बीच घात किया जाऊंगा।’’ (नीतिवचन 22:13)

 

9. वास्‍तविकता से हटकर स्‍वयं का मूल्‍यांकन करने वाला :

 

‘‘आलसी अपने को ठीक उत्‍तर देने वाले सात मनुष्‍यों से भी अधिक बुद्धि‍मान समझता है।’’ (नीतिवचन 26:16)

 

आलस्‍य से हानियॉं : -

 

आलस्‍य के दुगुर्णों के आधार पर यह स्‍पष्‍ट है कि आलस्‍य से परमेश्‍वर के द्वारा दिये गये समय, जीवन, योग्‍यताओं और अवसरों की बर्बादी होती है। आलसी अपनी ज़ि‍म्‍मेदारी पूरी नहीं कर पाता। इस प्रकार वह स्‍वयं के लिए और अपने सम्‍पर्क के सभी लोगों के लिए ग़लत उदाहरण ठहरता है। इस प्रकार के लोगों को बाइबिल में दुष्‍ट और आलसी दास की संज्ञा दी गई है जिनका अनन्‍त विनाश निश्चित है। (मत्‍ती 25:26)

 

बाइबिल परिश्रम को प्रोत्‍साहित करती है। वचन में यह बात स्‍पष्‍ट है कि ‘‘यदि कोई काम न करना चाहे तो वह खाने भी न पाए।’’ (2थिस्‍सलुनीकियों 3:10)

 

आलस्‍य कैसे दूर करें?

1. बाइबिल हमें आलस्‍य न करने और परिश्रम करने का आदेश देती है : आलस्‍य बाइबिल के निर्देश की अवहेलना करना है।

 

‘‘हे भाइयो, हम तुम्‍हें अपने प्रभु यीशु मसीह के नाम से आज्ञा देते हैं; कि हर एक ऐसे भाई से अलग रहो; जो अनुचित चाल चलता, और जो शिक्षा उस ने हम से पाई उसके अनुसार नहीं करता। क्‍योंकि तुम आप जानते हो, कि किस रीति से हमारी सी चाल चलनी चाहिए; क्‍योंकि हम तुम्‍हारे बीच में अनुचित चाल न चले। और किसी की रोटी सेंत मेंत न खाई; पर परिश्रम और कष्‍ट से रात दिन काम धन्‍धा करते थे, कि तुम में से किसी पर भार न हो। यह नहीं, कि हमें अधिकार नहीं; पर इसलिये कि अपने आप को तुम्‍हारे लिये आदर्श ठहराएं, कि तुम हमारी सी चाल चलो। और जब हम तुम्‍हारे यहां थे, तब भी यह आज्ञा तुम्‍हें देते थे, कि यदि कोई काम करना न चाहे, तो खाने भी न पाए। हम सुनते हैं, कि कितने लोग तुम्‍हारे बीच में अनुचित चाल चलते हैं; और कुछ काम नहीं करते, पर औरों के काम में हाथ डाला करते हैं। ऐसों को हम प्रभु यीशु मसीह में आज्ञा देते और समझाते हैं, कि चुपचाप काम करके अपनी ही रोटी खाया करें।’’

(2थिस्‍सलुनीकियों 3:6-12)

 

‘‘प्रयत्‍न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्‍माद में भरे रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।’’ (रोमियों 12:11)

 

‘‘जो काम तुझे मिले उसे अपनी शक्ति भर करना, क्‍योंकि अधोलोक में जहां तू जानेवाला है, न काम न युक्ति न ज्ञान और न बुद्धि‍ है।’’ (सभोपदेशक 9:10)

 

‘‘हे आलसी, च्‍यूंटियों के पास जा; उनके काम पर ध्‍यान दे, और बु‍द्धि‍मान हो। उनके न तो कोई न्‍यायी होता है, न प्रधान, और न प्रभुता करने वाला।’’ (नीतिवचन 6:6-7)

 

2. बाइबिल समय का सदुपयोग करने और योग्‍यताओं को बढ़ाने का आदेश देती है: सुस्‍ती से बाइबिल के इस आदेश की भी अवहेलना होती है।

 

उदाहरण : तोड़ों का दुष्‍टांत (मत्‍ती 25:13-30)

 

‘‘फिर अर्खिप्‍पुस से कहना कि जो सेवा प्रभु में तुझे सौंपी गई है, उसे सावधानी के साथ पूरी करना।’’ (कुलुस्सियों 4:17)

 

‘‘और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्‍वर पिता का धन्‍यवाद करो।’’ (कुलुस्सियों 3:17)

 

3. बाइबिल संसार की सभी बुराइयों में समय बर्बाद करने से बचने की सलाह देती है:

‘‘इसलिये ध्‍यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धि‍यों की नाईं नहीं पर बुद्धि‍मानों की नाई चलो। और अवसर को बहुमूल्‍य समझो, क्‍योंकि दिन बुरे हैं।’’

(इफिसियों 5:15-16)

‘‘हम को अपने दिन गिनने की समझ दे, कि हम बुद्धि‍मान हो जाएं।’’

(भजन संहिता 90:12)

 

4. बाइबिल बताती है कि हमें परमेश्‍वर के कार्यो को परिश्रमपूर्वक करना है :

 

‘‘क्‍योंकि हम उसके बनाये हुये हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्‍हें परमेश्‍वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।’’ (इफिसियों 2:10)

 

‘‘और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्‍न-भिन्‍न वरदान मिले हैं, तो जिसे भविष्‍यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्‍वास के परिणाम के अनुसार भविष्‍यद्वाणी करे। यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखानेवाला हो, तो सिखाने में लगा रहे। जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देनेवाला उदारता से दे, जो अगुवाई करे, वह उत्‍साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।’’ (रोमियों 12:6-8)

 

5. बाइबिल बताती है कि हमें बुद्धि‍और समझ प्राप्‍त करने के लिए परिश्रमपूर्वक यत्‍न करना है : आलस्‍य व्‍यक्ति को इस प्रयास से वंचित करता है।

 

‘‘शिक्षा को सुनो, और बुद्धि‍मान हो जाओ, उसके विषय में अनसुनी न करो।’’

(नीतिवचन 8:33)

 

6. बाइबिल सिर्फ़ अधिकारियों के भय से नहीं किन्‍तु परमेश्‍वर के भय से किये जाने वाले परिश्रम, लगन एवं विश्‍वासयोग्‍यता को प्रोत्‍साहित करती है : मसीही जीवन में आलस्‍य का कोई स्‍थान नहीं।

 

‘‘हे दासों, जो लोग शरीर के अनुसार तुम्‍हारे स्‍वामी हैं, अपने मन की सीधाई से डरते, और कांपते हुए, जैसे मसीह की, वैसे ही उन की भी आज्ञा मानो। और मनुष्‍यों को प्रसन्‍न करनेवालों की नाईं दिखाने के लिये सेवा न करो, पर मसीह के दासों की नाईं परमेश्‍वर की इच्‍छा पर चलो। और उस सेवा को मनुष्‍यों की नहीं, परन्‍तु प्रभु की जानकार सुइच्‍छा से करो। क्‍योंकि तुम जानते हो, कि जो कोई जैसा अच्‍छा काम करेगा, चाहे दास हो, और स्‍वतंत्र; प्रभु से वेसा ही पाएगा।’’ (इफिसियों 6:5-8)

 

7. प्रार्थना के साथ प्रयास सहित द्वारा परमेश्‍वर की सामर्थ्‍य से व्‍यक्ति इस आलस्‍य की गुलामी से मुक्‍त हो सकता है।

 

विशेष टिप्‍पणी : बाइबिल में नींद को परमेश्‍वर की आशीष बताया गया है। (भजन संहिता 127:2) यह परिश्रम करने वालों के दिल-दिमाग व शरीर की ताज़गी के लिए आवश्‍यक है। (सभोपदेशक 5:12) परमेश्‍वर ने स्‍वयं विश्रामदिन, विश्राम के लिए ठहराया है। (मरकुस 6:31) परमेश्‍वर ने दिन परिश्रम करने के लिए और रात आराम करने के लिए बनायी। यदि मनुष्‍य परमेश्‍वर द्वारा निर्धारित-नियमों का उल्‍लघंन करता है तो इसके त्रासदीपूर्ण परिणाम होते हैं।

Last Updated on Wednesday, 19 March 2008 23:22
 
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