दैनिक मनन


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    भली बातें‘‘निदान, हे भाइयो, जो जो बातें सत्‍य हैं.....आदरनीय हैं,....उचित हैं,.....पवित्र हैं,.....सुहावनी हैं,.....मनभावनी हैं,.....सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्‍यान लगाया करो’’। (फिलिप्पियों...

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बरब्‍बा और यीशु पीडीएफ़ मुद्रण ई-मेल
द्वारा लिखित स्‍व. डॉ. विजय लाल   
मंगलवार, 30 अगस्त 2011 15:53

बात उस समय की है जब प्रभु यीशु पर मुकदमा चलाया जा रहा था। प्रभु यीशु को गर्वनर पीलातुस के सम्‍मुख प्रस्‍तुत किया गया। उस पर दोषारोपण किये गये यहूदी पुरोहितों के किराये की भीड़ मांग करने लगी इसे क्रूस पर चढ़ाओ, इसे क्रूस पर चढ़ाओ। पीलातुस ने परख लिया कि यीशु निर्दोष पर वह उत्‍तेजित भीड़ को भी खुश रखना चाहता था। उसने भीड़ से कहा आज तुम्‍हारा एक विशेष धार्मिक पर्व है। इस दिन प्रथा एवं परम्‍परा के अनुसार एक कैदी को मुक्‍त कर दिया जाता है। एक कैदी यीशु है इसे तुम कहते हो इसे क्रूस पर चढ़ाओ दूसरा मृत्‍यु दण्‍ड प्राप्‍त कैदी बरब्‍बा है जो डाकू है। आज के दिन किसे मुक्‍त कर दूं। किसे छोड़ दूं तुम्‍हारे लिये भीड़ चिल्‍लाने लगी। बरब्‍बा को छोड़ दो यीशु को क्रूस पर चढ़ाओ, बरब्‍बा को छोड़ दो यीशु को क्रूस पर चढ़ाओ। गर्वनर पीलातुस ने यह सोचकर कि भीड़ बेकाबू न हो जाये आदेश दिया कि बरब्‍बा को छोड़ दिया जाये और यीशु को क्रूस पर चढ़ा दिया जाये।

बरब्‍बा क्रूस से बच जाता है यीशु मसीह क्रूस पर चढ़ाया जाता है। बरब्‍बा लौटता है जंगलों, खाईयों, पर्वतों, बिड़हरों से जाता हुआ वापिस अपनी गैंग के पास। उन लोगों के पास जो उसके अपने लोग थे अपने गिरोह के लोग थे उसके एक इशारे पर जान देने वाले लोग उसके एक इशारे जान लेने वाले लोग पर वहां पहुंचा तो दंग रह गया बरब्‍बा। गिरोह के लोगों तो सोच लिया था कि वह क्रूस पर चढ़ाया जा चुका है। दूसरा व्‍यक्ति सरदार बन चुका था।

निष्‍ठाये बदल चुकी थी। नये शक्ति केन्‍द्र स्‍थापित हो चुके थे। स्‍वामी भक्ति के पुराने मुखौटे फेंके जा चुके थे। नये चेहरे स्‍थापित हो चुके थे। स्‍वामी भक्ति के पुराने मुखौटे फेंके जा चुके थे। नये चेहरे, नये मुखौटे लगाये जा चुके थे। बरब्‍बा दंग रह गया। पिछला जीवन जैसे झूठ था, पात्र भी जैसे झूठे थे, लोग भी झूठे मानो प्रथम बार साक्षात्‍कार हुआ यथार्थ से, सच्‍चाई से, सत्‍य से और बरब्‍बा ने निर्णय किया कि अब वह उस झूठे जीवन में लौटना नहीं चाहता था। सत्‍ता, हिंसा, प्रतिशोध के जीवन में लौटना नहीं है जो झूठे इंसान, नकली इंसान, स्‍वार्थी और ढोंगी इंसान पैदा करता है। भारी कदमों से बरब्‍बा लौटता है और शुभ शुक्रवार की संध्‍या के अश्‍त होते सूर्य की किरणों में अब सुनसान पर्वत, उन तीन खाली क्रूसों को देखता है उनमें से एक पर मैं होता वो गुदगुदाता है। बरब्‍बा के चेहरे पर गहरी चिन्‍ता तीव्र आश्‍चर्य बोध अंधेरा गहराता जाता है बरब्‍बा के होंठो पर कम्‍पन हुआ। उसने मेरा स्‍थान ले लिया वह मेरे बदले में मरा वह मेरे लिये मरा।

एक गहरी अनुभूति आत्‍मा में, प्राण में वह मेरे लिये मरा और यह अनुभूति मात्र उस बरब्‍बा की नहीं इतिहास में बरब्‍बाओं की भीड़ की है। हजारों, लाखों, करोड़ों की है। मुझे मरना था वह मेरे लिये मरा। यही वह सिद्धांत है जिसे सब्‍सटूयूशन कहते हैं। एक को सजा दूसरे के लिये, एक को दुख दूसरे के लिये क्‍या औचित्‍य है, क्‍या जस्‍टीफेकेशन है एक को पीड़ा दूसरे के लिये क्‍या यह नैतिक है, क्‍या यह न्‍याय उचित है यह अजीब मालूम पड़े हमको पर यही वह अद्भुत ईश्‍वरीय प्रक्रिया है जो व्‍यक्ति को और समाज को विकास की ओर ले जाती है। आप में से अनेक तो उत्‍पन्‍न नहीं हुये होगे अद्वितीय महायुद्ध के समय जो उस समय थे उनकी विस्‍मृत संवेदनशीलता उतनी कुंठित नहीं हो सकती थी कि वे यह नासमझ पाये कि आज की जो पीढ़ी है वह इसलिये जिन्‍दा है कि पिछली पीढ़ी ने मौत का अलिंगन कर मौत को दूर ढकेल दिया था।

वे मर गये कि हम जिये और यदि हम सामाजिक सब्‍सटूयूशन के इस अर्थ को समझते है तो बरब्‍बा का अनुभव हमारा अनुभव होने में कोई कठिनाई नहीं होना चाहिये। याद आती है स्विट् युनिवर्सिटी उस कुशाग्र बुद्धि‍ विद्यार्थी की अफ्रीका चला गया मिशनरी बनकर विपरीत परिस्थितियों में प्रार्थना पूर्वक परमेश्‍वर के लिये परिश्रम करता रहा। ऐसे वातावरण में जिसमें कोई उत्‍सव नहीं, गुमनामी में खामोशी से अटूट परिश्रम किया और टूट गया। एक ही वर्ष में स्‍वस्‍थ्‍य ने जबाव दे दिया एक ही वर्ष में उस जवान की मृत्‍यु हो गई। उसने जो कहा था वह स्‍वर्ग अक्षरों में लिखे जाने योग्‍य है उसने कहा था अफ्रीका मिशन एक पुल जैसी है, सेतु जैसी है। पता नहीं कितने पत्‍थर गड़ने होते है धरती के भीतर इसके पहले कि पुल बन सके। पत्‍थर जिन्‍हें कोई देखता नहीं, जिन्‍हें कोई आदर या सम्‍मान नहीं मिलता।

यदि ईश्‍वर चाहता है कि मैं ऐसा ही अनदेखा गुमनाम विस्‍मृत नींव का पत्‍थर बनूं जो अफ्रीका की किसी कब्र में पड़ा रहे तो मैं सन्‍तुष्‍ट हूं क्‍योंकि अन्‍ततः ऐसे ही पत्‍थरों के आधार पर अफ्रीकन मिशन का वह पुल बनेगा जो लोगों को मसीह के पास लाने में सफल होगा। ऐसे लोग होते है जो मरते हैं कि दूसरे जीवन पा जाये। बरब्‍बा का अनुभव जायज है वह मरा मेरे लिये वह मर गया कि मैं जीवन पा जाऊं। यही नैतिकता है ईश्‍वरीय, यही विधान है ईश्‍वरीय, यही ईश्‍वरीय सिद्धांत है व्‍यक्ति के समाज के उत्‍थान का। आज मैं जो हूं वो इसलिये संभव हुआ कि मेरे माता-पिता ने त्‍याग किया तपस्‍या की वह जो उन्‍हें उपलब्‍ध था उसका उपभोग न किया कि मुझे उच्‍च शिक्षा दे सके। सुभाष चन्‍द्र बोस वर्मा के जंगलों में भटकते रहे, नेहरू और गांधी भी जेल में रहे कि हम आजाद हो जाये। आज हम उस स्‍वतंत्रता का उपभोग कर रहे हैं जितकी कीमत उन्‍होंने वर्षो पूर्व चुकाई थी।

जब शायद हम दुनिया में थे भी नहीं। ऐसी ही वह मृत्‍यु जो प्रभु यीशु मसीह ने स्‍वीकारी जब हम थे भी नहीं हमें वह जीवन दे गई, वह छुटकारा दे गई। जिसका उपभोग हम आज कर रहे हैं। चिकित्‍सा के क्षेत्र में शोध करते कितने विज्ञानिक खतरों से खेलते हैं। चाहे कीटाणुओं से भरपूर मांस का टुकड़ा हो, दवाओं का प्रभाव हो, एक्‍सरे की खोज हो, क्‍लोरोफॉर्म का अविष्‍कार हो कितनो ने स्‍वयं पर प्रयोग करके मृत्‍यु का सामना किया जिससे आज हमको जीवन मिल जाये। बरब्‍बा का अनुभव चेलों का भी अनुभव था। याद आती होगी चेलों को गतशमनी की वह निरसतभ रात अचानक निरसतभ को चीरता वो हुल्‍लड़ मशालें लाठियां प्रभु सामने आते हैं अन्‍य को बचाते हुये भीड़ से कहते हैं तुम कैसे ढूढ़ते हो यीशु नाशरती को तब यशु स्‍वयं को प्रस्‍तुत करते हैं चेलों की ओर इंगित करके कहते हैं तो इन्‍हें जाने दो मुझे बांधते हो इन्‍हें स्‍वतंत्र कर दो। विचित्र है पर सत्‍य है इसकी गहरी नापना संभव नहीं पर आत्‍मा की गहराई में सत्‍य की अनुभूति संभव है। वह बंधा की हम स्‍वतंत्र हो जाये। वह मरा कि हम जी जायें।

यह अनुभूति इसहाक की भी है, इसहाक 53:4-5 में वह कहता है हमारे अपराधों के कारण वह घायल किया गया, हमारे अधर्म के कामों के हेतु वह कुचला गया। उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो गये। यही अनुभूति पतरस की है। 1पतरस 3-18 में वह कहता है मसीह ने अधर्मियों के लिये, धर्मी ने पापों के कारण दुख उठाया ताकि हमें परमेश्‍वर के पास पहुंचाये। यही अनुभूति पौलुस की भी है। 2 कुरिन्थियों 5-14 में कहता है एक सब के लिये मरा और यही अनुभूति यूहन्‍ना की है। जो प्रभु की ओर इंगित करके कहता है यूहन्‍ना 1-29 में जगत को मेम्‍ना, मेम्‍ना बलिदान होता था पापों के लिये, मेम्‍ना बलिदान होता था पापों के लिये तुम्‍हारे पापों के एवज में ये सारे जगत के पापों के एवज में बलिदान होने वाला मेम्‍ना है, करोड़ों बरब्‍बा कह सके यह मेरे लिये मरा। यदि आपको आत्‍मा में इस सत्‍य का ज्ञान हो जाये तो यह अद्भुत आत्मिक अनुभूति आपको वह नया जीवन देगी। जिसे जीवन को देने के लिये प्रभु को मृत्‍यु को ग्रहण कर लिया था। ईश्‍वर इस सत्‍य को जानने में आपकी सहायता करे कि आप भी बरब्‍बा के समान कह सके वह मेरे लिये मरा, वह मरा कि मैं जीवन को पा जाऊं।

 
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