दैनिक मनन

  • मसीही होने का आशय ही....
    मसीही होने का आशय ही....‘‘पर यदि मसीही होने के कारण दुःख पाए, तो लज्जित न हो, पर इस बात के लिए परमेश्‍वर की महिमा करे’’। (1 पतरस 4:16)आज के युग में प्राय सभी देशों में लोकतांत्रि‍क सरकरों का गठन किया...

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नये नियम की कलीसिया की सदस्‍यता PDF Print E-mail
Written by डॉ. श्रीमती शीला लाल   
Thursday, 08 July 2010 15:20

(अधिकार व कर्तव्‍यो की विस्‍तृत जानकारी)
आधार पद- इसलिये तुम अब विदेशी और मुसाफिर नही रहे परन्‍तु पवित्र लोगों के संगी स्‍वदेशी और परमेश्‍वर के घराने के हो गये। (इफिसियों 2:19) तीन महत्‍वपूर्ण आधारभूत सत्‍य-

1. चर्च या कलीसिया एक --------------- है।   (परिवार)

2. परमेश्‍वर की यह अपेक्षा है कि आप चर्च परिवार के -----------बने। (सदस्‍य)

3. एक मसीही का बगैर चर्च परिवार के रहना--------नहीं हैं।   (बाइबिल सम्‍मत)

बाइबिल हमें बतलाती है-
वे प्रेरितो से शिक्षा पाने और संगति रखने में और रोटी तोड़ने में और प्रार्थना करने में लौलीन रहे। (प्रेरितों के काम 2:42)

 
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