दैनिक मनन

  • परमेश्‍वर का वचन स्थिर है
    परमेश्‍वर का वचन स्थिर है ‘‘जैसा तू ने किया है, वैसा ही तुझ से भी किया जाएगा, तेरा व्‍यवहार लौटकर तेरे ही सिर पर पड़ेगा’’। (ओबद्याह 1:1-7,15)ओबद्याह और नहूम समानता में सम्‍बन्घित हैं कि वे इस्राएल...

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क्‍या आपने कभी सोचा की एक मसीही होने का क्‍या अर्थ है ? PDF Print E-mail
Written by डॉ. श्रीमती शीला लाल   
Thursday, 08 July 2010 15:17

शायद आपने स्‍वयं से ये प्रश्‍न किये हो- - मैं यहां क्‍यों हूं ?

- समस्‍या क्‍या है ?

- समाधान क्‍या है ?

- परमेश्‍वर मुझसे क्‍या चाहता है ?

- मेरा बपतिस्‍मा क्‍यों होना चाहिये ?

- बपतिस्‍में का क्‍या अर्थ व तात्‍पर्य है ?

- डूब का बपतिस्‍मा ही लेना क्‍यों आवश्‍यक है ?

- किसका बपतिस्‍मा होना चाहिये ?

- मैंने प्रभु यीशु मसीह पर विश्‍वास किया कई बर्षो से चर्च में लगातार उपस्थित हुआ परन्‍तु बपतिस्‍मा नहीं लिया- क्‍या मुझे अभी भी बपतिस्‍मा लेना आवश्‍यक है ?

 
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