दैनिक मनन

  • मसीही जीवन : आनंद का जीवन
    मसीही जीवन : आनंद का जीवन ‘‘तू मुझे जीवन का रास्‍ता दिखाएगा; तेरे निकट आनंद की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है’’। (भजन सं‍हिता 16:10) आज संपूर्ण विश्‍व सुख विलास की खोज में भटक...

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मसीही होने का क्‍या अर्थ है PDF Print E-mail
Written by डॉ. श्रीमती शीला लाल   
Thursday, 08 July 2010 15:13

तुम सब उस विश्‍वास करने के द्वारा जो मसीह यीशु पर है परमेश्‍वर की संतान हो और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्‍मा लिया है उन्‍होंने मसीह को पहन लिया है अब न कोई यहूदी रहा और न यूनानी न कोई दास न स्‍वतंत्र न कोई नर न नारी क्‍योंकि तुम सब मसीह यीशु में एक हो ।
(गलतियों 3:26-28)

मनुष्‍य सुख और शान्ति की खोज़ में निरंतर लगा रहता है कुछ व्‍यक्ति अपना सम्‍पूर्ण जीवन इस खोज में लगा देते हैं जंगलो में भटकते है, कुछ व्‍यक्ति यह जानने का अथक प्रयास करते हैं कि परमेश्‍वर का उनके जीवन में क्‍या उद्देश्‍य है परमेश्‍वर उनसे क्‍या चाहता है एक सामान्‍य प्रश्‍नजो आम व्‍यक्ति पूछता है वह यह कि ‘‘जीवन का क्‍या अर्थ’’(meaning) हैं

प्रत्‍येक व्‍यक्ति खुशी की चाहत में है और उसकी प्राप्‍ति के भिन्‍न तरीके हैं-

- कोई सांसारिक (भौतिकता की अधिकाई (ऐश्‍वर्य) को प्रसन्‍नता का साधन मानता है।

- कोई सांसारिक, शारीरिक खुशियों के अनुभव को प्रसन्‍नता का आधार मानता है

- कोई पद, शक्ति, प्रतिष्‍ठा को प्रसन्‍नता का आधार मानता है।

परन्‍तु वास्‍तविक प्रसन्‍नता या खुशी हमें तब मिलती है जब हम अपने जीवन के ------- को समझ लेते हैं। (उद्देश्‍य)

 
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