दैनिक मनन

  • वर्जित फल का परिणाम
    वर्जित फल का परिणाम ‘‘जो वृक्ष बाटिका के बीच में है, उसके फल विषय में परमेश्‍वर ने कहा है न तो तुम उसको खाना और न उसको छूना, नहीं तो मर जाओगे’’। (उत्‍पत्ति‍ 3:1-5)शैतान ने मनुष्‍य को किस प्रकार पाप...

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यह बात हमें विशिष्‍ठ बनाती है PDF Print E-mail
Written by डॉ. श्रीमती शीला लाल   
Thursday, 08 July 2010 15:08

तब परमेश्‍वर ने मनुष्‍य को अपने स्‍वरूप के अनुसार उत्‍पन्‍न किया अपने ही स्‍वरूप के अनुसार परमेश्‍वर ने उसको उत्‍पन्‍न किया नर और नारी करके उसने मनुष्‍यों की सृष्टि की और परमेश्‍वर ने उनको आशीष दी और उनसे कहा फूलो फलों और पृथ्‍वी में भर जाओं और उनको अपने वश में कर लों और समुद्र की मछलियों तथा आकाश के पक्षियों और पृथ्‍वी पर रेंगने वाले सब जन्‍तुओं पर अधिकार रखो।  (उत्‍पत्ति 1:27-28)

परमेश्‍वर हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायात से देता है।    (1 तिमुथियुस 6:17)

प्रभु यीशु मसीह ने कहा- मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं और बहुतायत से पायें। (यूहन्‍न 10:10)
सो अब जो मसीह यीशु में है उन पर दण्‍ड की आज्ञा नहीं क्‍योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्‍मा के अनुसार चलते हैं। (रोमियों 8:1)

स. परमेश्‍वर को जानना उसे पहचानना उससे प्रेम करना और उसके साथ साथ जीवन बिताने का प्रयास करना तथा निरंतर इस बात की प्रार्थना पूर्ण खोज में रहना की उसका हमारे जीवन से क्‍या उद्देश्‍य हैं। तब निश्‍चय जानिये व निश्चित रहिये कि परमेश्‍वर प्रभु यीशु में हमें बहुता या प्रसन्‍नतापूर्ण जीवन व वास्‍तविक अनन्‍त लाभ प्रदान करते हैं हमारा जीवन आशीषित होता है कुछ लाभ जिन्‍हे हम अनुभव कर सकते हैं वे इस प्रकार हैं-

 
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