दैनिक मनन

  • विश्‍वास का बल पाना
    विश्‍वास का बल पाना ‘‘विश्‍वास करने के लिए सब कुछ हो सकता है’’। (मरकुस 9:23)लूका 17:6 में स्‍पष्‍ट होता है कि विश्‍वास में एक बड़ा बल होता है। मसीही जीवन में उद्धार प्राप्‍त करना हमारा लक्ष्‍य है...

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समाधान क्‍या है ? PDF Print E-mail
Written by डॉ. श्रीमती शीला लाल   
Thursday, 08 July 2010 15:04

प्रभु यीशु मसीह ने कहा मार्ग सत्‍य और जीवन मैं ही हूं बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। (यूहन्‍ना 14:6)
परमेश्‍वर इस संसार में मानव स्‍वरूप में इसलिये अवतरित हुए कि वे हमें अपने पास वापस ला सकें यदि कोई और मार्ग संभव होता तो प्रभु यीशु मसीह को इस संसार में नही आना पड़ता। मार्ग एक व्‍यक्ति है प्रभु यीशु मसीह। केवल उन्‍ही का अनुसरण कर हम उद्धार कर हम उद्धार पा सकते हैं स्‍वर्ग जा सकते हैं।

परमेश्‍वर चाहता है कि हम इस प्रकार के गुणों से भरपूर जीवन जिये फिर क्‍यों अधिकांश मनुष्‍यों का जीवन खुशियों से वंचित रहता है ?

हमारे अधर्म उसकी धार्मिकता के लहू से ढांके जाते हैं और हम परमेश्‍वर के अनुग्रह और प्रेम के कारण उसके सन्‍मुख उसकी समीपी में रह सकते हैं। आपको यह जानना आवश्‍यक हैं।

अ.------------- ने आपकी पाप की समस्‍या का समाधान कर दिया है (प्रभु यीशु मसीह)     
पाप की मजदूरी तो मृत्‍यु है परन्‍तु परमेश्‍वर का वरदान हमारे प्रभु यीशु ने अनन्‍त जीवन हैं । रोमियों (6:23) ब. परमेश्‍वर ने हमारे लिए यह विशेष योजना इसलिये अनायी क्‍योंकि वह हमसे प्‍यार करता है और चाहता है कि हम उसे जाने ताकि नाश न हों नर्क से बचे। परमेश्‍वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। (रोमियों 5:8)
परमेश्‍वर एक ही है और परमेश्‍वर और मनुष्‍यो के बीच में भी एक ही बिचवई (मध्‍यस्‍त) है अर्थात् मसीह यीशु जो मनुष्‍य है जिसने अपने आप को सबके छुटकारे के लिये दाम में दे दिया। (1 तिमुथियुस 2:5-6)

परमेश्‍वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया ताकि जो कोई उस पर विश्‍वास करें वह नाश न हो परन्‍तु  अनन्‍त जीवन पाये। (यूहन्‍ना 3:16)

स. परमेश्‍वर ने मनुष्‍य और ईश्‍वर के टूटे संबंधो को जोड़ने के लिये अनूठी योजना बनायी और अपने पुत्र प्रभु यीशु को इस संसार में भेजकर उसके महान बलिदान के द्वारा यह पहल की, एक मार्ग हमें दिया कि हम उसके नज़दी‍क आ सकें अब वह इंतिजार करता है कि हम व्‍यक्तिगत रूप से कब प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता और मुक्तिदाता स्‍वीकार करते हैं। ह्रदय की गहराईयों से इस सत्‍य को स्‍वीकारते है और कब हममें से हर एक व्‍यक्तिगत रूप से समर्पित भाव से यह---------करता है कि परमेश्‍वर ने हमारे लिये जो किया वह हमें हमारे पापों से-------देकर-----------दे सकता है। यह हमारी पहल होगी ईश्‍वर से संबंध बनाने में। (स्‍वीकार, मुक्ति, उद्धार)

विश्‍वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्‍हारा उद्धार हुआ है और यह तुम्‍हारी ओर से नहीं वरन परमेश्‍वर का दान है और न कर्मो के कारण ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करें। (इफिसियों 2:8-9)

 
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