दैनिक मनन

  • मसीही के रूप में हमारी पहचान
    मसीही के रूप में हमारी पहचान      ‘‘एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैंने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो’’।(यूहन्‍ना 13:34,35)  आज जिस संसार में हम रहते है, वह पूरी तरह से शैतान के...

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बूझो तो जानें PDF Print E-mail
Written by डॉ. श्रीमती इन्‍दु लाल   
Friday, 05 February 2010 14:57

1.दुश्‍मन पर हो दुश्‍मन गालिब
भाई-भाई को मारे
किसका खून मगर धरती से
परमेश्‍वर को पुकारे।
उत्‍तर- कैन हाबिल

2.लिपट गये सागर से सागर
रहा न कोई किनारा
एक चीज़ दुनिया में बच गई
डूब गया जग सारा।
उत्‍तर- नूह का जहाज

3.किस लड़के के पांव बांधकर
डाला ऐसा बेड़ा
बाप ने जैसे छुरा उठाया
झाड़ से बोला मेढ़ा।
उत्‍तर- इसहाक

4.किसने धरती और आकाश के
बीच में देखी सीढ़ी
सीढ़ी पर से ईश्‍वर ने
दी बरकत पीढ़ी-पीढ़ी।
उत्‍तर- याकूब

5.ना हाथी ना हौदा प्‍यारे
ना बैंड ना बाजा
लादू के बच्‍चे पर आया
यरूशलेम का राजा।
उत्‍तर- यीशु मसीह

6.किसी ने भाला किसी ने मोती
किसी ने गौहर मांगा
किसकी लड़की ने नाच दिखाकर
दुश्‍मन का सिर मांगा ।
उत्‍तर- हेरोदियास

7.मां का मान बढ़े बैरागी
मां कहलाए जो नारी
सब मांओं में एक मां बढ़ गई थी
लेकिन वह कुंवारी
उत्‍तर- मरियम

8.मैं परमेश्‍वर का भय मानती
खजूर के पेड़ के नीचे बैठती
सब लोग मुझे नबिया कहते
बताओं तुम मुझे क्‍या कहते।
उत्‍तर- दबोरा

9.श से मेरा नाम है
बालों से मैं बलवान हूं
प्रभु का मैं नाज़ीर कहलाता
अन्‍त में मैं हज़ारों को मार गिराता।
उत्‍तर. शिमशोन

10.तीन बार मैंने इन्‍कार किया
मुर्गे ने बांग दी
मैं रोया पश्‍चाताप किया
प्रभु पर मैंने विश्‍वास किया।
उत्‍तर- पतरस

11.बताओं मैं कौन हूं
एक विवाह भोज में मैं गया
दाखरस खत्‍म वहां हो गया
मां ने मुझसे कहा,
पानी दाखरस बन गया।
उत्‍तर- यीशु मसीह

12.हम कौन थे, हमने
सोने की मूरत को दण्‍डवत् नहीं किया
राजा ने आज्ञा दी आग के भट्टे में हमें
डाल दिया प्रभु यीशु ने हमें बचा लिया।
उत्‍तर- शद्रक, मेशक, अबेदनगो

13.मैं बन्‍धुवाई में बाबुल आया
तीन बार मैं प्रार्थना करता
सिंहों की मांद में मूझे डाल दिया
परमेश्‍वर के द्वारा मैं बचाया गया।
उत्‍तर- दानिय्येल

14.आकाश से हूं मैं गिरा
इस्राएलियों ने मुझे है खाया
जिसने ज्‍यादा बटोरा उसका
उसका अधिक न हुआ
जिसने कम बटोरा उसका कम न हुआ।
उत्‍तर- मन्‍ना

15.जाना था मुझे नीनवे
भाग गया मैं तर्शीश
समु्द्र में आया तूफान
लोगों ने मुझे फेंक दिया
मछली ने मुझे निगल लिया।
उत्‍तर- योना

16.कोढ़ से पीड़ि‍त था
एलीशा ने मुझे आज्ञा दी
यर्दन नदी में मैंने डुबकी लगाई
प्रभु के नाम से मैंने चंगाई पाई।
उत्‍तर- नामान

17.बताओं मैं कौन हू
मैं अन्‍य जाति से आई हूं
सास के साथ प्रेम का रिश्‍ता निभाई हूं
परमेश्‍वर को संग चलने का दृढ़ निश्‍चय किया
प्रभु यीशु की वंशावली में शामिल होने का
सौभाग्‍य मुझे मिला है।
उत्‍तर- रूत

18.मेरे चचेर भाई ने मेरा पालन-पोषण
पुत्री के रूप में किया।
मैं अत्‍यन्‍त सुन्‍दर और रूपवती थी।
उत्‍तर- एस्‍तेर

19.मैं जन्‍मते ही यहोवा का मारा,
बहुत रोगी हो गया और अपने
पिता की प्रार्थना और उपवास मुझे
मरने से न बचा सके।
उत्‍तर- राजा दाऊद का पुत्र

20.मुझे मेरी मां ने दूध छुड़ाते ही मन्दिर में छोड़ दिया।
उत्‍तर- शमूएल

21.वृद्धावस्‍था में जन्‍म लिया,
प्रौढ़ावस्‍था में अपने पिता की
इच्‍छानुसार पत्‍नी को प्राप्‍त किया।
उत्‍तर- इसहाक

22.परमेश्‍वर से गिड़गिड़कर प्रार्थना की,
तो उसमें जीवन आ गया तो मां ने कहा-
अब मैं जान गई हूं कि तू परमेश्‍वर का जन है।
वह कौन था?
उत्‍तर- एलिय्याह

23.मिट्टी में, जीवन का है श्‍वांस फूंका,
अपनी समानता में मुझे बनाया, बताओं मैं कौन।
उत्‍तर- आदम

24.जब जागा तब पता चला
मेरा शरीर है कुछ हल्‍का,
मेरी पसली कहां गई,
किसका है निर्माण हुआ।
उत्‍तर- हव्‍वा

25.जिसने आज्ञा पालन करने के कारण अपने समस्‍त
परिवार को पृथ्‍वी के अन्‍य लोगों के साथ नष्‍ट होने से बचा लिया।
उत्‍तर- नूह

26.जिसने आज्ञा पालन करने के कारण अपने स्‍वामी के लिये
उत्‍तम जीवन साथी का चयन करने में परमेश्‍वर की अगुवाई ली।
उत्‍तर- एलीऐजर

27.जो आज्ञा पालन के कारण यहोवा से लिपटा रहा और
उसके पीछे चलना न छोड़ा।
इसलिये यहोवा उसके संग रहा और जहां कहीं वह जाता था
वहां उसका कार्य सफल होता था।
उत्‍तर- हिजकिय्याह राजा

28.आदि माता मैं कहलाई परमेश्‍वर की बात न मानकर,
शैतान की बातों में आई, मैं कौन हूं?
उत्‍तर- हव्‍वा


 
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