| किसने किससे कहा (पुराने नियम से) |
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| Written by डॉ. श्रीमती इन्दु लाल | |||
| Friday, 05 February 2010 11:40 | |||
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1. तुम भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल कभी न खाना। 2. फूलो फलो और पृथ्वी में भर जाओं। 3. तू पेट के बल चला करेगा, और जीवन भर मिट्टी चाटेगा 4. तू अपने लिये गोपेर की लकड़ी का एक जहाज बना। 5. तेरा भाई हाबिल कहां है? 6. लड़ाई झगड़ा हम दोनों के लिये ठीक नहीं, अच्छा हो हम अलग अलग रहें। 7. आग और लकड़ी तो हमारे पास है, परन्तु होमबलि के लिये मेम्ना कहां है। 8. तूने मेरे लिये इकलौते पुत्र को भी नहीं रख छोड़ा। 9. मुझे इस दाल के बदले अपने पहिलौठेपन का अधिकार बेच दे। 10. तेरा भाई छल पूर्वक आकर आर्शीवाद लेकर चला गया है। 11. जाकर करीत नाले में छुप जा। 12. मैं लोगों के लिये आकाश से रोटी बरसाऊंगा। 13. हम उसकी हत्या न करें बलिक उस सूखे गड्ढे में डाल दें उत्तर- रूबेन ने अपने भाईयों से कहा। 14. मैं जो हूं सो हूं। 15. मेरे सिर पर उस्तरा कभी नही फिरा क्योंकि मैं परमेश्वर का नाज़ीर हूं। 16. तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा, जहां तू मरेगी वहां मैं भी मरूंगी। 17. क्या आज्ञा, मुझे क्यों पुकारा। 18. नीनवे को जा, और वहां के लोगों को प्रचार कर। 19. मैं और मेरी जाति के लोग नाश होने पर हैं राजा हमें प्राणदान दे।
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