दैनिक मनन

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    परमेश्‍वर भेंटे नहीं, पहले जीवन चाहता है ‘‘यदि तू भला करे, क्‍या तो तेरी भेंट ग्रहण न की जाएगी?’’ (उत्‍पत्ति 4:1-9)  परमेश्‍वर ने आदम और हव्‍वा को कई बेटे और बेटियों दी थीं, परन्‍तु कैन सबसे बड़ा और...

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Written by डॉ. श्रीमती इन्‍दु लाल   
Friday, 05 February 2010 10:51

1. वर्तमान सन्‍दर्भ में मसीह युवाओं का राष्‍ट्र की राजनीति में सक्रिय होना ही मसीही समाज एवं कार्यो को विकास दे सकता है।

2. सफल पारिवारिक जीवन के लिये मसीही युवाओं को विवाह के निर्णय के पूर्व साथ-साथ समय बिताने की स्‍वीकृति परिवार तथा समाज द्वारा दी जाना चाहिए।

3. मसीही युवाओं को मसीही समाज की रक्षा और विकास के लिये एक अतिवादी (एक्‍सट्रीमिस्‍ट) संगठन बनाना आवश्‍यक है।

4. युवाओं को सही दिशा देने के लिये यीशु की शिक्षाओं के अतिरिक्‍त आदर्श चरित्र के व्‍यक्तियों का होना भी आवश्‍यक है।

5. मसीही युवाओं का राजनीति में जाना उचित नहीं है।

6. टेलीविजन का बढ़ता प्रभाव सांस्‍कृतिक मूल्‍यों का
अवमूल्‍यन कर रहा है।

7. मसीही समाज में व्‍यक्तिगत स्‍वार्थो के कारण कलीसिया की एकता प्रभावित हो रही है।

8. सरकार द्वारा जारी यह आदेश उचित है कि व्‍यस्‍क कार्यक्रम रात्रि‍ 11 बजे के बाद टेलीविजन पर प्रसारित किया जाना चाकिए।

9. पाश्‍चात्‍य सम्यता भारतीय संस्‍कृति के लिए खतरा है।

10. वर्तमान समय में दस आज्ञाओं का पालन करना सम्‍भव नहीं है।

11. वचन का प्रचार अपने कार्यो द्वारा करना सम्‍भव नहीं है।

12. संयुक्‍त परिवार की धारणा को बाइबिल सहमति नहीं देती है।

13. मसीही युवा परिवार के विकास में अपना योगदान नहीं देते हैं।

14. वर्तमान सन्‍दर्भ में टी, व्‍ही. के सीरियल और मूवीज व्‍यक्ति को मसीही जीवन की राह से भटका रहे हैं।

15. प्रभु यीशु मसीह की प्रभाव पूर्ण गवाही देने के लिए जवानों को पूर्ण का‍लिक मसीही सेवा को ही प्राथमिकता देना चाहिए।

16. वर्तमान परिवेश में संसार की समस्‍याओं का हल केवल प्रभु यीशु मसीह की शिक्षाओं से ही सम्‍भव है।

17. व्‍यक्ति की मानसिकता, मूल्‍यों और उद्देश्‍यों को पहचाने बिना विवाह करना अनुचित है।

18. जीवन के उद्देश्‍य केवल माता-पिता के निर्देर्शो के आधार पर ही बनाना चाहिए।

 
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