दैनिक मनन

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    परमेश्‍वर नैतिक धार्मिकता की मांग करता है ‘‘मानना तो बलि चढ़ाने से, और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है।...... तू ने जो यहोवा की बात को तुच्‍छ जाना, इसलिये उसने तुझे राजा होने के लिये तुच्‍छ...

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चौथा पाठ -चौथा धन्‍य PDF Print E-mail
Written by डॉ. श्रीमती इन्‍दु लाल   
Thursday, 04 February 2010 15:43

धन्‍य वचन - धन्‍य हैं वे, जो धर्म के भूखे और प्‍यासे हैं, क्‍योंकि वे तृप्‍त किए जाएंगे।

धन का अर्थ – खुश, आशीषित, सन्‍तुष्‍ट।

मनुष्‍य की शारीरिक भूख रोटी से तृप्‍त होती है और प्‍यास पानी से। भूख और प्‍यास लगना स्‍वस्‍थ शरीर की निशानी है, इसी से शरीर का विकास होता है और उर्जा प्राप्‍त होती है।

मनुष्‍य एक आत्मिक प्राणी भी है। प्रभु यीशु मसीह को पता था कि मनुष्‍य की आत्‍मा भी भूखी और प्‍यासी होगी और इस भूख से मनुष्‍य आत्मिक रूप से स्‍वयं को कमज़ोर महसूस करेगा। इसीलिए उसने कहा जीवन की रोटी मैं हूं और जीवन का जल मैं हूं जो मेरे पास आएगा और मुझे ग्रहण करेगा वह कभी भूखा और प्‍यासा नहीं होगा।

यदि मनुष्‍य को परमेश्‍वर के साथ सम्‍बन्‍ध बनाने की और उसकी इच्‍छाओं को जानने और मानने की भूख और प्‍यास न हो तो वह आत्मिक रूप से स्‍वस्‍थ माना ही नहीं जा सकता। इसके बिना उसका आत्मिक रूप से विकास नहीं हो सकता। इसके बिना वह आत्मिक परिपक्‍वता की ओर नहीं बढ़ सकता और न ही इसके बिना वह आत्मिक रूप दृढ़ और मज़बूत हो सकता है।

यूहन्‍ना 4:14 - परन्‍तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्‍तकाल तक पियासा न होगा: बरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्‍त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा

यूहन्‍ना 6:35 - यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और मुझ पर विश्‍वास करेगा, वह कभी पियासा न होगा।

उसे मालूम था कि मनुष्‍य को इस संसार में रहते हुए धन, पद, प्रतिष्‍ठा, सफलता आदि की भूख होगी, उसे मालूम था कि शैतान और संसार मनुष्‍य की भूख को तृप्‍त करने के लिए बहुत से Junk food  (ऐसा भोजन जो हानिकारक है) परोसेगा- जैसे अश्‍लील साहित्‍य, चोरी, डकैती, अनैतिक सम्‍बन्‍ध, झूठ, फरेब, नशीली वस्‍तुएं आदि --। उसे मालूम था कि न सब साधनों से मनुष्‍य को कभी तृप्ति होगी नहीं, उसकी भूख और प्‍यास कभी मिटेगी नहीं बल्कि उम्र और समय के साथ यह बढ़ती जाएगी। उसने कहा पहले उसके राज्‍य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्‍तुएं भी तुम्‍हें दी जाएंगी।

मत्‍ती 6:33 - इसलिये पहिले तुम उसके राज्‍य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्‍तुएं भी तुम्‍हें मिल जाएंगी।

उसका राज्‍य क्‍या है?
विश्‍वासियों का समूह या कलीसिया। जिसका वह राजा और शासक है।

धर्म क्‍या है?
यह एक ऐसा साधन है जिसके द्वारा हमारा व्‍यक्तिगत सम्‍बन्‍ध एकमात्र सच्‍चे और जीवित परमेश्‍वर से होता है।

धार्मिकता क्‍या है?

सच्‍चे और जीवित परमेश्‍वर को अपने जीवन में स्‍वीकार कर उसकी आज्ञाओं के अनुरूप विश्‍वासयोग्‍यता का जीवन जीना ही धार्मिकता है।

- जिस व्‍यक्ति को वास्‍तव में धर्म की भूख और प्‍यास है वह उद्धार (पापों की क्षमा एवं अनन्‍त जीवन की निश्चितता) ढूंढ़ेगा।

- जिस व्यक्ति को धर्म की भूख और प्‍यास होगी वह परमेश्‍वर के साथ अपने मज़बूत व्‍यक्तिगत सम्‍बन्‍ध बनाने का प्रयास करेगा। जिसका सीधा सम्‍बन्‍ध विश्‍वासयोग्‍यता और आज्ञाकारिता से है।

- जिस व्‍यक्ति को धर्म की भूख और प्‍यास होगी वह व्‍यक्ति निरन्‍तर परमेश्‍वर के वचन का अध्‍ययन कर उसकी इच्‍छा को जानने का प्रयास करेगा और स्‍वयं के जीवन को वचन के प्रकाश में आगे बढ़ाएगा।

- जिस व्‍यक्ति को धर्म की भूख और प्‍यास होगी वह प्रार्थना के द्वारा निरन्‍तर परमेश्‍वर के साथ बातचीत करेगा।

- जिस व्‍यक्ति को धर्म की भूख और प्‍यास होगी वह निरन्‍तर अपना सम्‍बन्‍ध परमेश्‍वर की देह अर्थात् कलीसिया से बनाकर रखेगा। और उसकी देह की उन्‍नति, दृढ़ता व पवित्रता के लिए वह यथासम्‍भव सक्रियता के साथ प्रयास करेगा। क्‍योंकि मसीह को प्रेम करने का दावा उसकी देह से अलगाव के साथ सम्‍भव है ही नही। देह से अलग हुआ अंग मृतक हो जाता है। इस क‍टे हुए अंग को कोई महत्‍व नहीं होता है।

- जिस व्‍यक्ति को धर्म की भूख और प्‍यास होगी तो वह दूसरों की इस भूख और प्‍यास के प्रति भी संवेदनशील होगा और दूसरों को भी जीवन के जल और जीवन की रोटी के पास लाने का पूरा पूरा प्रयास करेगा।

यह भूख निरन्‍तर जारी रहने वाली प्रक्रिया है। जिस प्रकार सुबह नाश्‍ता कर लेने से पूरे दिन की भूख नहीं मिट जाती परन्‍तु पुनः भोजन एवं पानी की आवश्‍यकता होती है। उसी प्रकार यह धर्म की भूख और प्‍यास अर्थात् परमेश्‍वर के साथ निरन्‍तर बने रहने की चाहत हमेशा बनी रहती है इसी से आत्‍मा को तृप्ति मिलती है। हम आशीषित, आन्‍नद और सन्‍तुष्टि की भूख और प्‍यास न रखें, हम उन्‍हें पहले प्राप्‍त करने का व्‍यर्थ प्रयास न करें परन्‍तु पहले स्‍वयं में धर्म की भूख और प्‍यास जागृत करें। क्‍योंकि यही भूख और प्‍यास हमारे जीवनों को परमेश्‍वर की ओर से आशीष, आनन्‍द और सन्‍तुष्टि से भर देगी।

हम कैसे जानें कि हम में धर्म की भूख और प्‍यास है या नहीं?

- क्‍या हम रविवार को चर्च जाकर सन्‍तुष्‍ट रहते हैं या फिर हम हर दिन परमेश्‍वर के साथ प्रार्थना में, वचन के अध्‍ययन में और हर परिस्थिति, हर समय में वचन के अनुरूप जीवन जीने का प्रयास करते हैं?

1 पतरस 2:2 – नये जन्‍मे हुए बच्‍चे की नाई निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्घार पाने के लिये बढ़ते जाओ।

इब्रानियों 5:11-14 - इस के विषय के विषय में हमें बहुत सी बातें कहनी हैं, जिन का समझना भी कठिन है; इसलिये कि तुम ऊंचा सुनने लगे हो। समय के विचार से तो तुम्‍हें गुरू हो जाना चाहिए था, तौभी क्‍या आवश्‍‍यक है, कि कोई तुम्‍हें परमेश्‍वर के वचनों की आदि शिक्षा फिर से सिखाएं? और ऐसे हो गए कि हो, कि तुम्‍हें अन्‍न के बदले अब तक दूध ही चाहिए। क्‍योंकि दूध पीनेवाले बच्‍चे को तो धर्म के वचन की पहिचान नहीं होती, क्‍योंकि वह बालक है। पर अन्‍न सयानों के लिये है, जिन के ज्ञानेन्द्रिय अभ्‍यास करते करते, भले बुरे में भेद करने के लिये पक्‍के हो गए हैं।

नोट – यदि हमारी आत्मिक भूख व प्‍यास खेल, टी. वी. सिनेमा, पढ़ाई या किसी अन्‍य ज़ि‍म्‍मेदारियों, शौक आदि के कारण कम हो गई है तो हम समय रहते उन कारणों को दूर करें।

- क्‍या हमारी आत्मिक भूख और प्‍यास सांसारिक साधनों से तृप्‍त हो सकती?

- क्‍या हमको परमेश्‍वर की क्षमा, दया, सामर्थ्‍य व अनुग्रह की कोई आवश्‍यकता नहीं होती है?

- क्‍या हमारी धर्म की भूख और प्‍यास सशर्त है? कि हम परमेश्‍वर की आशीष को प्राप्‍त करना चाहते हैं परन्‍तु संसार के लोभ लालच, गलत मित्रों, शौक, आदत व अनैतिक सम्‍बन्‍धों को नहीं छोड़ना चाहते?

- क्‍या हम धर्म की भूख और प्‍यास की तृप्ति को बुजुर्ग अवस्‍था में पूरा करने के लिए कल पर टाले हुए हैं?

- क्‍या हम सोचते हैं कि पहले हम सुधर जाएं, योग्‍य बन जाएं तभी परमेश्‍वर हमें ग्रहण करेगा? वास्‍तव में परमेश्‍वर हमें हम जैसे हैं, वैसी ही हालत में स्‍वीकार करने लिए तैयार और तत्‍पर रहता है। परन्‍तु फिर उसके साथ चलने के लिए वह अपेक्षा करता है कि हमारे जीवन में मात्र जो कुछ बुरा है वह हम छोडें और आज्ञाकारिता और विश्‍वासयोग्‍यता के साथ आगे बढ़ें। देर करना अनन्‍त त्रासदी की बात हो सकती है।

उदाहरण- लाज़र के साथ धनवान व्‍यक्ति (लूका 16:19-31) और धनवान किसान के दृष्‍टांत (लूका 12:15-21) को इस सम्‍बन्‍ध में विस्‍तारपूर्वक समझांए।

- क्‍या हम में सुसमाचार प्रचार कर, आत्‍माओं कों जीत कर प्रभु यीशु मसीह की भूख और प्‍यास शान्‍त करने की भूख और प्‍यास है?

स्‍मरण रखिए ये धर्म की भूख और प्‍यास ही हमारी आत्‍मा को बलवान बनाएगी, हमारे आन्‍तरिक मनुष्‍यत्‍व को निखारेगी, हमे ऐसा दृढ़ चरित्र प्रदान करेगी कि बाहरी शैतानी व सांसारिक प्रलोभन, आन्‍धी और तूफान के समान आने वाली परीक्षाएं हमें किसी भी प्रकार से अशान्‍त, असन्‍तुष्‍ट व श्रापित नहीं कर पाएंगी और हम वास्‍तव में आशीषित, आनन्दित व सन्‍तुष्‍ट ठहरकर आगे बढ़ पाएंगे।

 
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