दैनिक मनन

  • हमारे हाथ में क्‍या है?
    हमारे हाथ में क्‍या है?‘‘दाऊद ने पलिश्‍ती पर गोफन और एक ही पत्‍थर के द्वारा प्रबल होकर उसे मार डाला’’।(1शमूएल 17:49,50)बाइबिल में अनेक स्‍थनों पर ऐसी घटनाओं का वर्णन है जब लोगों के पास छोटी-छोटी...

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आठवां पाठ आठवां एवं नौवां धन्‍य PDF Print E-mail
Written by डॉ. श्रीमती इन्‍दु लाल   
Thursday, 04 February 2010 14:57

वास्‍तव में आठवां और नौवां धन्‍य वचन एक ही है। जिसमें विश्‍वास की गवाही के कारण सताए जाने की बात है। परन्‍तु ऐसे ही विश्‍वासी लोगों के ‍ लि‍ए यह प्रतिज्ञा भी है कि वे ही धन्‍य, आशीषित और आनन्दित ठहराए जाएंगे। उनके लिए स्‍वर्ग के राज्‍य और वहां महान प्रतिफल की प्रतिज्ञा है।

धन्‍य वचन- धन्‍य हैं वे, जो धार्मिकता के कारण सताए जाते हैं, क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्‍य उन्‍हीं का है।

धन्‍य का अर्थ – खुश, आशीषित, सन्‍तुष्‍ट।

धर्म का अर्थ - यह एक ऐसा साधन है जिसके द्वारा हमारा व्‍यक्तिगत सम्‍बन्‍ध एकमात्र सच्‍चे और जीवित परमेश्‍वर से होता है।

धार्मिकता का अर्थ – परमेश्‍वर के भय में उसकी आज्ञाओं के अनुरूप विश्‍वासयोग्‍यता का जीवन जीना।

धर्म और धार्मिकता के कारण सताए जाने का अर्थ - बहुत बार मसीही कहे जाने वाले लोग ग़लत, गैरकानूनी व अनैतिक कार्यो में सलग्‍न रहते हैं। और जब इन कार्यो का दुष्‍परिणाम उनके सामने आता है तो वे इसे सताव की संज्ञा दे देते हैं। जो एक बिल्‍कुल झूठ बात होती है। इस संदर्भ में 1 पतरस 4:15-16 में स्‍पष्‍ट लिखा है – तुम में से कोई व्‍यक्ति हत्‍यारा या चोट, या कुकर्मी होने, या पराए काम में हाथ डालने के कारण दुःख न पाए। पर यदि मसीही होने के कारण दुःख पाए तो लज्जित न हो, पर इस बात के लिये परमेश्‍वर की महिमा करे।

- बहुत बार प्रभु यीशु मसीह को स्‍वीकार करने के कारण व्‍यक्ति को परिवार, समाज तथा व्‍यवसाय से जुड़े हुए लोगों का तिरस्‍कार व निन्‍दा सहना पड़ती है। यह धर्म के कारण सताए जाने की बात है।

- कभी शासन करी आज्ञाएं प्रभु यीशु मसीह की आज्ञाओं के विरोध में होती हैं। जैसे- प्रचार मत करो, किसी को मसीह की निकटता में न लाओं, आराधना भवन का निर्माण मत करो। यदि इनके द्वारा व्‍यक्ति का शासन के दण्‍ड व हानि से गुज़रना पड़ता है तो इसे धर्म के कारण सताए जाने की संज्ञा दी जा सकती है।

- यह कहना कि प्रभु यीशु मसीह ही एक मात्र सच्‍चा, जीवता ईश्‍वर है केवल उसी के द्वारा ही उद्धार है, केवल वही मार्ग सत्‍य और जीवन है, उसकी ही शिक्षाएं सिद्ध और सम्‍पूर्ण मानवता के लिए उपयोगी व सामयिक हैं- अधिकांश लोगों को नागवार होता है। यह बात भी सताव का कारण बनती है।

किस प्रकार हम संसार के अनुचित तरीकों से सताव से बच सकते हैं?

- यदि हम किसी पर यह बात प्रगट ही न करें कि हम मसीही हैं। हमारे जीवन से उसकी गवाही न हो। गैर मसीहियों के समान ही हमारी भी भाषा, व्‍यवहार, आचरण व जीवन शैली हो।
उदाहरण – पतरस (मरकुस 14:71)।

- जब हम ऐसी बातों का कोई विरोध न करें जिससे प्रभु यीशु मसीह का अपमान हो रहा है।
उदाहरण – सभी शिष्‍य (मरकुस 14:50) जो यीशु को छोड़ कर भाग गये।

- जब हम भी प्रभु यीशु मसीह को अन्‍य सभी ईश्‍वरों के समान ही एक और ईश्‍वर मान लें।
उदाहरण- नबूकदनेस्‍सर राजा, कैसर, हेरोदेस को अपना ईश्‍वर मानो तो सब ठीक रहेगा नहीं तो नौकरी जाएगी, जान जाएगी।

- जब हम भीड़ को प्रसन्‍न करने के लिए हर प्रकार का समझौता कर लें।
उदाहरण- पीलातुस (लूका 23:15,22; मरकुस 15:10,15)।

नोट- उपरोक्‍त सभी बातें एक विश्‍वासी मसीही के लिए असम्‍भव हैं।
विश्‍वासी के सामने चुनाव की बात रहती है कि वह आज्ञाकारिता के कारण पीड़ा (सताव) स्‍वीकार करे या आत्‍मग्‍लानि का दर्द (अनाज्ञाकारिता के कारण); जो आज्ञाकारिता के दर्द से कहीं अधिक हृदय को कचोटता है जिसमें व्‍यक्ति स्‍वयं ही अपनी नज्ररों से गिर जाता है।

सताव के प्रमाण-

1. सताव से गुज़रने वाले विश्‍वासी प्रगट करते हैं कि वे शैतान के नहीं किन्‍तु परमेश्‍वर की सन्‍तान हैं और वे निश्चित रूप से उसके है।

2. यह निश्चित प्रमाण है कि उनकी नागरिकता संसार की नहीं किन्‍तु स्‍वर्ग की है।

3. सताव से गुज़रने के द्वारा विश्‍वास की परख होती है। और यह प्रमाणित होता है कि विश्‍वासी होने का दावा सच्‍चा है या झूठा।

फिलिप्पियों 1:28-30 – और किसी बात में विरोधियों से भय नहीं खाते? यह उन के लिये विनाश का स्‍पष्‍ट चिन्‍ह है, परन्‍तु तुम्‍हारे लिये उद्धार का, और यह परमेश्‍वर की ओर से है। क्‍योंकि मसीह के कारण तुम पर अनुग्रह हुआ, कि न केवल उस पर विश्‍वास करो पर उसके लिये दुःख भी उठाओ। और तुम्‍हें वैसा ही परिश्रम करना है, जैसा तुम ने मुझे करते देखा है, और अब भी सुनते हो, कि मैं वैसा ही करता हूं।

धर्म और धार्मिकता के कारण सताव के उदाहरण-

1. स्‍वयं प्रभु यीशु मसीह
यूहन्‍ना 15:18-20 - यदि संसार तुम से बैर रखता है, तो तुम जानते हो, कि उस ने तुम से पहिले मुझ से भी बैर रखा। यदि तुम संसार के होते, तो संसार अपनों से प्रीति रखता, परन्‍तु इस कारण तुम संसार के नहीं, बरन मैंने तुम्‍हें संसार में से चुन लिया है इसी लिये संसार तुम से बैर रखता है। जो बात मैंने तुम से कही थी, कि दास अपने स्‍वामी से बड़ा नहीं होता, उसको याद रखो; यदि उन्‍होंने मुझे सताया, तो तुम्‍हें भी सताएंगे; यदि उन्‍होंने मेरी बात मानी, तो तुम्‍हारी भी मानेंगे।

2. हाबिल जो कैन के द्वारा सताया गया और मार डाला गया।
इब्रानियों 11:4 - विश्‍वास ही से हाबिल ने कैन से उत्‍तम बलिदान परमेश्‍वर के लिये चढ़ाया; और उसी के द्वारा उसके धर्मी होने की गवाही भी दी गई; क्‍योंकि परमेश्‍वर ने उस की भेंटों के विषय में गवाही दी; और उसी के द्वारा वह मरने पर भी अब तक बातें करता है।

3. अधिकांश नबी।
इब्रानियों 11:35-38 - स्त्रि‍यों ने अfपने मरे हुओं को फिर जीवते पाया; कितने तो मार खाते मर गए; और छुटकारा न चाहा; इसलिये कि उत्‍तम पुनरूत्‍थान के भागी हों। कई एक ठट्ठों में उड़ाए जाने; और कोड़े खाने; बरन बान्‍धे जाने; और कैद में पड़ने के द्वारा परखे गए।  पत्‍थरवाह किए गए; आरे से चीरे गए;  उन की परीक्षा की गई; तलवार से मारे गए; वे कंगाली में और क्‍लेश में और दुःख भोगते हुए भेड़ों और बकरियों की खालें ओढ़ें हुए, इधर-उधर मारे-मारे फिरे। और जंगलों, और पहाड़ों, और गुफाओं में, और पृथ्‍वी की दरारों में भटकते फिरे।

4. दानिय्येल प्रार्थना करने के कारण सिंहों की मांद में डाला गया।
दानिय्येल 6:10 – जब दानिय्येल को मालूम हुआ कि उस पत्र पर हस्‍ताक्षर किया गया है, तब वह अपने घर में गया जिसकी उपरौठी कोठरी की खिड़कियां यरूशलेम के सामने खुली रहती थी, और अपनी रीति के अनुसार जैसा वह दिन में तीन बार अपने परमेश्‍वर के साम्‍‍हने घुटने टेककर प्रार्थना और धन्‍यवाद करता था, वैसा ही तब भी करता रहा।

5. शद्रक, मेशक, अबेदनगो नबूकदनेस्‍सर राजा की मूर्ति के सामने दण्‍डवत् न करने के कारण आग की भट्टी में डाले गए।
दानिय्येल 3:17-18 – हमारा परमेश्‍वर, जिसकी हम उपासना करते हैं वह हम को उस धधकते हुए भट्ठे की आग से बचाने की शक्ति रखता है; वरन हे राजा वह हमें तेरे हाथ से भी छुड़ा सकता है। परन्‍तु यदि नहीं, तो हे राजा तुझे मालूम हो, कि हम लोग तेरे देवता की उपासना नहीं करेंगे, और न तेरी खड़ी कराई हुई सोने की मूरत को दण्‍डवत् करेंगे।

6. यीशु के अधिकांश शिष्‍य गवाही के कारण सताए गए और अस्‍वाभाविक रीति से मार डाले गए।
प्रेरितों के काम 4:18-20 – तब उन्‍हें बुलाया और चितौनी देकर यह कहा, कि यीशु के नाम से कुछ भी न बोलना और न सिखलाना। परन्‍तु पतरस और यूहन्‍ना ने उन को उत्‍तर दिया, कि तुम ही न्‍याय करो, कि क्‍या यह परमेश्‍वर के निकट भला है, कि हम परमेश्‍वर की बात से बढ़कर तुम्‍हारी बात मानें। क्‍योंकि यह तो हम से हो नहीं सकता, कि जो हम ने देखा और सुना है, वह न कहें।
प्रेरितों के काम 5:28-29 – क्‍या हम ने तुम्‍हें चिताकर आज्ञा न दी थी, कि तुम इस नाम से उपदेश न करना? तौभी देखो, तुम ने सारे यरूशलेम को अपने उपदेश से भर दिया है और उस व्‍यक्ति का लोहू हमारी गर्दन पर लाना चाहते हो। तब पतरस और, प्रेरितों ने उत्‍तर दिया, कि मनुष्‍यों की आज्ञा से बढ़कर परमेश्‍वर की आज्ञा का पालन करना ही कर्तव्‍य कर्म है।

7. पौलुस
2 कुरिन्थियों 11:23-27 - मैं पागल की नाई कहता हूं मैं उन से बढ़कर हूं! अधिक परिश्रम करने में; बार बार कैद होने में; कोड़े खाने में; बार बार मृत्‍यु के जोखिमों में। पांच बार मैंने यहूदियों के हाथ से उन्‍तालीस-उन्‍तालीस कोड़े खाए। तीन बार मैंने बेंते खाई; एक बार पत्‍थरवाह किया गया; तीन बार जहाज जिन पर मैं चढ़ा था, टूट गए; एक रात दिन मैं ने समुद्र में काटा। मैं बार बार यात्राओं में; नदियों के जोखिमों में; डाकुओं के जोखिमों में; अपने जातिवालों से जोखिमों में; अन्‍यजातियों से जोखिमों में; नगरों में के जोखिमों में; जंगल के जोखिमों में; समुद्र के जोखिमों में; झूठे भाइयों के बीच जोखिमों में। परिश्रम और कष्‍ट में; बार बार जागते रहने में; भूख-पियास में; बार बार उपवास करने में; जाड़े में; उघाड़े रहने में।

सताव किन के द्वारा आता है?

- अधिकांश नबियों व प्रभु यीशु मसीह को दिखावटी (तथाकथित) धर्मिक अगुवों के द्वारा ही प्रताड़ि‍त किया गया। क्‍योंकि उनके द्वारा इन अगुवों की झूठी धार्मिकता, पाप, अधर्म, पाखण्‍ड, स्‍वार्थ और अधिकार के लोभ का सच लोगों के सामने प्रगट किया गया।
यूहन्‍ना 3:19-21- और दण्‍ड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्‍योति जगत में आई है, और मनुष्‍यों ने अन्‍धकार को ज्‍योति से अधिक प्रिय जाना क्‍योंकि उन के काम बुरे थे। क्‍योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्‍योति से बैर रखता है, और ज्‍योति के निकट नहीं आता, ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए। परन्‍तु जो सच्‍चाई पर चलता है, वह ज्‍योति के निक‍ट आता है, ताकि उसके काम प्रगट हों, कि वह परमेश्‍वर की ओर से किए गए हैं।

- यह सताव परिवार के लोगों, मित्रों, समाज व शासन के द्वारा भी आता है।

मत्‍ती 10:32-39 – जो कोई मनुष्‍यों के साम्‍हने मुझे मान लेगा, उसे मैं भी अपने स्‍वार्गीय पिता के साम्‍हने मान लूंगा। पर जो कोई मनुष्‍यों के साम्‍हने मेरा इन्‍कार करेगा उस से मैं भी अपने स्‍वर्गीय पिता के साम्‍हने इन्‍कार करूंगा। यह न समझो, कि मैं पृथ्‍वी पर मिलाप कराने को आया हूं; मैं मिलाप कराने को नहीं, पर तलवार चलवाने आया हूं। मैं तो आया हूं, कि मनुष्‍य को उसके पिता से, और बेटी को उसकी मां से, और बहू को उसकी सास से अलग कर दूं। मनुष्‍य के बैरी उसके घर ही के लोग होंगे। जो माता या पिता को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्‍य नहीं और जो बेटा या बेटी को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्‍य नहीं। और जो अपना क्रूस लेकर मेरे पीछे न चले वह मेरे योग्‍य नहीं। जो अपने प्राण बचाता है, वह उसे खोएगा; और जो मेरे कारण अपना प्राण खोता है, वह उसे पाएगा।

- यह यीशु तथा वचन की भविष्‍यवाणी है कि जितने भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं, वे सब सताए जाएंगे।

2 तीमुथियुस 3:12 - पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताएं जाएंगे।

यूहन्‍ना 15:20 ब – यदि उन्‍होंने मुझे सताया, तो तुम्‍हें भी सताएंगे।

मसीही जीवन में सताव के प्रतिफल –

1. परमेश्‍वर के द्वारा धन्‍य अर्थात् आशीषित, आनन्दित और सन्‍तुष्‍ट ठहराया जाना।

2. स्‍वर्ग में बड़ा प्रतिफल प्राप्‍त करना।
2 कुरिन्थियों 4:17 - क्‍योंकि हमारा पल भर का हलका सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्‍त महिमा उत्‍पन्‍न करता जाता है।
2 तीमुथियुस 4:7-8 - मैं अच्‍छी कुश्‍ती लड़ चुका हूं, मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैंने विश्‍वास की रखवाली की है। भविष्‍य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्‍यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, बरन उन सब को भी जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं।

3. परमेश्‍वर की प्रशंसा के पात्र ठहरना।
1 पतरस 2:19 - क्‍योंकि यदि कोई परमेश्‍वर का विचार करके अन्‍याय से दुख उठाता हुआ क्‍लेश सहता है, तो ये सुहावना है।

4. मनुष्‍यों में परमेश्‍वर की प्रभावशाली गवाही बनना।
2 कुरिन्थ्रियों 4:10 - हम यीशु की मृत्‍यु को अपनी देह में हर समय लिए फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो।

5. मसीह के दुखों में सहभागी होना।
फिलिप्पियों 3:10 -  और मैं उसको और उसके मृत्‍युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुःखों में सहभागी होने के मर्म को जानूं, और उस की मृत्‍यु की समानता को प्राप्‍त करूं।

रोमियों  8:17- और यदि सन्‍तान हैं, तो वारिस भी, बरन परमेश्‍वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं, जब कि हम उसके दुःख उठाएं कि उसके साथ महिमा भी पाएं।

6. भविष्‍यद्वक्‍ताओं की श्रेणी में आ जाना।
मत्‍ती 5:12 - आनन्दित और मगन होना क्‍योंकि तुम्‍हारे लिये स्‍वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्‍हों ने उस भविष्‍यद्वक्‍ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति सताया था।

नौवें धन्‍य में सताव से गुज़रते समय विश्‍वासी का व्‍यवहार किस प्रकार हो यह बताया गया है। उन्‍हें पौलुस और सीलास के समान (प्रेरितों के काम 16:24-25) आनन्दित और मगन रहने के लिए कहा गया है। यह तभी सम्‍भव है जब हम परि‍स्थिति की ओर नहीं किन्‍तु परमेश्‍वर की ओर, संसार की ओर नहीं किन्‍तु इस संसार के पार की ओर ध्‍यान केन्द्रित करें।

Last Updated on Thursday, 04 February 2010 15:05
 
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