| आठवां पाठ आठवां एवं नौवां धन्य |
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| Written by डॉ. श्रीमती इन्दु लाल | |||
| Thursday, 04 February 2010 14:57 | |||
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वास्तव में आठवां और नौवां धन्य वचन एक ही है। जिसमें विश्वास की गवाही के कारण सताए जाने की बात है। परन्तु ऐसे ही विश्वासी लोगों के लिए यह प्रतिज्ञा भी है कि वे ही धन्य, आशीषित और आनन्दित ठहराए जाएंगे। उनके लिए स्वर्ग के राज्य और वहां महान प्रतिफल की प्रतिज्ञा है। धन्य वचन- धन्य हैं वे, जो धार्मिकता के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है। धन्य का अर्थ – खुश, आशीषित, सन्तुष्ट। धर्म का अर्थ - यह एक ऐसा साधन है जिसके द्वारा हमारा व्यक्तिगत सम्बन्ध एकमात्र सच्चे और जीवित परमेश्वर से होता है। धार्मिकता का अर्थ – परमेश्वर के भय में उसकी आज्ञाओं के अनुरूप विश्वासयोग्यता का जीवन जीना। धर्म और धार्मिकता के कारण सताए जाने का अर्थ - बहुत बार मसीही कहे जाने वाले लोग ग़लत, गैरकानूनी व अनैतिक कार्यो में सलग्न रहते हैं। और जब इन कार्यो का दुष्परिणाम उनके सामने आता है तो वे इसे सताव की संज्ञा दे देते हैं। जो एक बिल्कुल झूठ बात होती है। इस संदर्भ में 1 पतरस 4:15-16 में स्पष्ट लिखा है – तुम में से कोई व्यक्ति हत्यारा या चोट, या कुकर्मी होने, या पराए काम में हाथ डालने के कारण दुःख न पाए। पर यदि मसीही होने के कारण दुःख पाए तो लज्जित न हो, पर इस बात के लिये परमेश्वर की महिमा करे। - बहुत बार प्रभु यीशु मसीह को स्वीकार करने के कारण व्यक्ति को परिवार, समाज तथा व्यवसाय से जुड़े हुए लोगों का तिरस्कार व निन्दा सहना पड़ती है। यह धर्म के कारण सताए जाने की बात है। - कभी शासन करी आज्ञाएं प्रभु यीशु मसीह की आज्ञाओं के विरोध में होती हैं। जैसे- प्रचार मत करो, किसी को मसीह की निकटता में न लाओं, आराधना भवन का निर्माण मत करो। यदि इनके द्वारा व्यक्ति का शासन के दण्ड व हानि से गुज़रना पड़ता है तो इसे धर्म के कारण सताए जाने की संज्ञा दी जा सकती है। - यह कहना कि प्रभु यीशु मसीह ही एक मात्र सच्चा, जीवता ईश्वर है केवल उसी के द्वारा ही उद्धार है, केवल वही मार्ग सत्य और जीवन है, उसकी ही शिक्षाएं सिद्ध और सम्पूर्ण मानवता के लिए उपयोगी व सामयिक हैं- अधिकांश लोगों को नागवार होता है। यह बात भी सताव का कारण बनती है। किस प्रकार हम संसार के अनुचित तरीकों से सताव से बच सकते हैं? - यदि हम किसी पर यह बात प्रगट ही न करें कि हम मसीही हैं। हमारे जीवन से उसकी गवाही न हो। गैर मसीहियों के समान ही हमारी भी भाषा, व्यवहार, आचरण व जीवन शैली हो। - जब हम ऐसी बातों का कोई विरोध न करें जिससे प्रभु यीशु मसीह का अपमान हो रहा है। - जब हम भी प्रभु यीशु मसीह को अन्य सभी ईश्वरों के समान ही एक और ईश्वर मान लें। - जब हम भीड़ को प्रसन्न करने के लिए हर प्रकार का समझौता कर लें। नोट- उपरोक्त सभी बातें एक विश्वासी मसीही के लिए असम्भव हैं। सताव के प्रमाण- 1. सताव से गुज़रने वाले विश्वासी प्रगट करते हैं कि वे शैतान के नहीं किन्तु परमेश्वर की सन्तान हैं और वे निश्चित रूप से उसके है। 2. यह निश्चित प्रमाण है कि उनकी नागरिकता संसार की नहीं किन्तु स्वर्ग की है। 3. सताव से गुज़रने के द्वारा विश्वास की परख होती है। और यह प्रमाणित होता है कि विश्वासी होने का दावा सच्चा है या झूठा। फिलिप्पियों 1:28-30 – और किसी बात में विरोधियों से भय नहीं खाते? यह उन के लिये विनाश का स्पष्ट चिन्ह है, परन्तु तुम्हारे लिये उद्धार का, और यह परमेश्वर की ओर से है। क्योंकि मसीह के कारण तुम पर अनुग्रह हुआ, कि न केवल उस पर विश्वास करो पर उसके लिये दुःख भी उठाओ। और तुम्हें वैसा ही परिश्रम करना है, जैसा तुम ने मुझे करते देखा है, और अब भी सुनते हो, कि मैं वैसा ही करता हूं। धर्म और धार्मिकता के कारण सताव के उदाहरण- 1. स्वयं प्रभु यीशु मसीह 2. हाबिल जो कैन के द्वारा सताया गया और मार डाला गया। 3. अधिकांश नबी। 4. दानिय्येल प्रार्थना करने के कारण सिंहों की मांद में डाला गया। 5. शद्रक, मेशक, अबेदनगो नबूकदनेस्सर राजा की मूर्ति के सामने दण्डवत् न करने के कारण आग की भट्टी में डाले गए। 6. यीशु के अधिकांश शिष्य गवाही के कारण सताए गए और अस्वाभाविक रीति से मार डाले गए। 7. पौलुस सताव किन के द्वारा आता है? - अधिकांश नबियों व प्रभु यीशु मसीह को दिखावटी (तथाकथित) धर्मिक अगुवों के द्वारा ही प्रताड़ित किया गया। क्योंकि उनके द्वारा इन अगुवों की झूठी धार्मिकता, पाप, अधर्म, पाखण्ड, स्वार्थ और अधिकार के लोभ का सच लोगों के सामने प्रगट किया गया। - यह सताव परिवार के लोगों, मित्रों, समाज व शासन के द्वारा भी आता है। मत्ती 10:32-39 – जो कोई मनुष्यों के साम्हने मुझे मान लेगा, उसे मैं भी अपने स्वार्गीय पिता के साम्हने मान लूंगा। पर जो कोई मनुष्यों के साम्हने मेरा इन्कार करेगा उस से मैं भी अपने स्वर्गीय पिता के साम्हने इन्कार करूंगा। यह न समझो, कि मैं पृथ्वी पर मिलाप कराने को आया हूं; मैं मिलाप कराने को नहीं, पर तलवार चलवाने आया हूं। मैं तो आया हूं, कि मनुष्य को उसके पिता से, और बेटी को उसकी मां से, और बहू को उसकी सास से अलग कर दूं। मनुष्य के बैरी उसके घर ही के लोग होंगे। जो माता या पिता को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं और जो बेटा या बेटी को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं। और जो अपना क्रूस लेकर मेरे पीछे न चले वह मेरे योग्य नहीं। जो अपने प्राण बचाता है, वह उसे खोएगा; और जो मेरे कारण अपना प्राण खोता है, वह उसे पाएगा। - यह यीशु तथा वचन की भविष्यवाणी है कि जितने भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं, वे सब सताए जाएंगे। 2 तीमुथियुस 3:12 - पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताएं जाएंगे। यूहन्ना 15:20 ब – यदि उन्होंने मुझे सताया, तो तुम्हें भी सताएंगे। मसीही जीवन में सताव के प्रतिफल – 1. परमेश्वर के द्वारा धन्य अर्थात् आशीषित, आनन्दित और सन्तुष्ट ठहराया जाना। 2. स्वर्ग में बड़ा प्रतिफल प्राप्त करना। 3. परमेश्वर की प्रशंसा के पात्र ठहरना। 4. मनुष्यों में परमेश्वर की प्रभावशाली गवाही बनना। 5. मसीह के दुखों में सहभागी होना। रोमियों 8:17- और यदि सन्तान हैं, तो वारिस भी, बरन परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं, जब कि हम उसके दुःख उठाएं कि उसके साथ महिमा भी पाएं। 6. भविष्यद्वक्ताओं की श्रेणी में आ जाना। नौवें धन्य में सताव से गुज़रते समय विश्वासी का व्यवहार किस प्रकार हो यह बताया गया है। उन्हें पौलुस और सीलास के समान (प्रेरितों के काम 16:24-25) आनन्दित और मगन रहने के लिए कहा गया है। यह तभी सम्भव है जब हम परिस्थिति की ओर नहीं किन्तु परमेश्वर की ओर, संसार की ओर नहीं किन्तु इस संसार के पार की ओर ध्यान केन्द्रित करें।
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| Last Updated on Thursday, 04 February 2010 15:05 |



