| कब्रिस्तान या प्रभु-वाटिका? |
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| Written by लेखक मण्डल | |||
| Thursday, 22 October 2009 15:39 | |||
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कब्रिस्तान या प्रभु-वाटिका? ‘‘इसके पश्चात् इब्राहीम ने अपनी पत्नी सारा को, उस मकपेलावाली भूमि की गुफ़ा में जो मम्रे के अर्थात् हेब्रोन के सामने कनान देश में है, मिट्रटी दी’’। (उत्पत्ति 23:1-20) बाइबिल में इस प्रकार मृतकों की अन्तिम क्रिया का वर्णन क्यों है? इससे हमारे लिए यही शिक्षा है कि हम भी अपने प्रियों की मृत देह का आदरपूर्वक अन्तिम संस्कार करें। इब्राहीम ने भूमि की वास्तविक क़ीमत से कही अधिक क़ीमत चुकाकर भूमि मोल ली और तब उस उपयुक्त स्थान में सारा का अन्तिम संस्कार किया। बहुत से स्थानों में कब्रिस्तानों की दयनीय दशा है। उसे कूड़ा- कचरा फेंकने तथा विभिन्न प्रकार की गन्दगी करने का उपयुक्त स्थान बना लिया गया है। यह अध्याय यही बताता है कि हम अपने प्रियों के मृत देह के दफनाने के स्थान को भी साफ-सुरक्षित रखें और अन्तिम संस्कार आदरपूर्वक ऐसे स्थानों में करें जहां मृत देह का निरादर नहीं हो। प्रार्थना- हे पिता, हमारी सहायता कर कि हम अपने कब्रिस्तानों को भी ऐसा स्थान बनाएं जहां से तेरी गवाही और महिमा हो। आमीन।
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| Last Updated on Friday, 30 October 2009 11:36 |



