| चेतावनी |
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| Written by श्री. एस.के. सैमुएल | |||
| Saturday, 17 March 2007 21:27 | |||
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‘‘अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो’’ (1कुरिन्थियों 6:20)। मसीही परिवारों के आशा के केन्द्र, कलीसियाओं के सुदृढ़ स्तम्भ, वर्तमान घोर निराशा के अंधकार में एकमात्र उत्साह की किरण हमारे मसीही युवा किस दिशा में जा रहे हैं? यह एक बड़ा ही अहम् प्रश्न बन गया है। बार-बार पत्र-पत्रिकाओं, रेडियो एवं टी.वी. समाचारों में युवाओं के दिग्भ्रमित हो जाने और समाज-विरोधी अनैतिक कार्यों में लिप्त होने के वृतांत बहुतायत से मिलते रहते हैं, परन्तु सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात तो यह है कि हमारे मसीही परिवारों के युवा भी इन सबसे अछूते नहीं हैं। वे युवावस्था में अपनी बुद्धि, शारीरिक शक्ति और आत्मा के रूप में मिले हुए ईश्वरीय तोड़ों का दुरूपयोग कर रहे हैं, जिनका हिसाब उनके माता-पिता या हमारा समाज ले या न ले, उनका स्वामी अवश्य ही लेगा (लूका 19:15)। प्रस्तुत लेख के माध्यम से, पवित्र शास्त्र के वचनों की अगुवाई में, मैं जवानों से अपील करता हूं कि वे अपनी देह, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हों और उसके द्वारा ईश्वर की महिमा करें। सर्वप्रथम, मैं बड़ी विनम्रतापूर्वक आपको स्मरण दिलाना चाहता हूं – ‘‘क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मंदिर है; जो तुममें बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है और तुम अपने नहीं हो? क्योंकि दाम देकर मोल लिये गये हो, इसलिए अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो’’ (1कुरिन्थियों 6:19,20)। और फिर ‘‘यदि कोई परमेश्वर के मंदिर को नाश करेगा तो परमेश्वर उसे नाश करेगा; क्योंकि परमेश्वर का मंदिर पवित्र है, और वह तुम हो’’ (1कुरिन्थियों 3:17)। 1. युवावस्था परिश्रम का, कार्यशीलता का पर्याय है, उसे अपनाएं – युवावस्था सक्रियता है, चुस्ती-फुर्ती है, उत्साह है, दृढ़ता है, गतिशीलता है, ओज-तेज है, सौंदर्य है, सम्मान है। ये सब श्रम के उत्पाद हैं तथा कठिन परिश्रम और अच्छे स्वास्थ्य से प्राप्त होते हैं। युवावस्था में आराम, आलस्य का कोई स्थान नहीं परन्तु दुर्भाग्यवश हमारे अधिकांश युवा आज ऐशो-आराम, आलस्य और श्रमरहित जीवन शैली पसंद करते हैं। वे क्लबों, होटलों – रेस्टोरेंट्स में निरूद्देश्य गप्पें मारते; गाड़ियों में घूमते-फिरते; या फिर घंटों टी.वी., वीडियो के सामने बैठे; या चौराहों पर जमघट बनाए या समय-असमय आरामदेह शैया पर लम्बी चादर ताने, समय की बर्बादी करते रहते हैं। श्रम से जी चुराना, खेलकूद, व्यायाम से हटते जाना, रचनात्मक कार्यों से दूर रहना युवकों की एक आम प्रवृत्ति बन गई है। युवको, आलस्य त्यागें; वचन कहता है ‘‘हे आलसी, च्यूंटियों के पास जा; उनके कामों पर ध्यान दे, और बुद्धिमान हो’’ (नीतिवचन 6:9)। याद रखें, ‘‘कामकाजी लोग प्रभुता करते हैं’’ (नीतिवचन 12:24)। जो परिश्रम करते, पसीना बहाते हैं, आलस्य त्यागते हैं – वे विजयी होते हैं, प्रभुत्व स्थापित करते हैं। क्या कठोर अभ्यास के बिना प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीते जा सकते हैं? ‘‘आलसी का मार्ग कॉंटों से रून्धा हुआ होता है’’ (नीतिवचन 15:19) वचन कहता है ‘‘हे आलसी, तू कब तक सोता रहेगा.......... तेरा कंगालपन बटमार की नाईं और तेरी घटी हथियार बन्द के समान आ पड़ेगी’’ (नीतिवचन 6:9-11)। ‘‘कामकाजी लोग अपने हाथों के द्वारा धनी होते हैं’’ (नीतिवचन 10:4)। अपने श्रम से निर्धनता दूर करें, घटियों की पूर्ति करें। यदि कुछ पाना है, आगे बढ़ना है, ऊंचाईयों पर पहुंचना है तो आलस्य और ऐशो-आराम त्याग कर परिश्रम करें; स्वयं को पुष्ट-चुस्त, सुंदर बनाएं। कर्मवीर बनें, बकवादी बनकर समय बर्बाद न करें क्योंकि ‘‘जो अपना मुंह बन्द रखता है वह बुद्धि से काम लेता है’’ (नीतिवचन 10:19)। अपनी युवावस्था को श्रम के मार्ग पर अग्रसर होने दें। 2. अपना चाल-चलन वचनानुसार बदलें – आज हमारे और अन्य धर्मियों के युवाओं के चाल-चलन में कोई अन्तर दिखाई नहीं देता। यह स्वाभाविक है कि आधुनिक समाज, परिस्थितियों और प्रलोभनों का प्रभाव सभी पर समान रूप से पड़ रहा है किन्तु मसीहियत की शिक्षा पाये हुए युवाओं का चरित्र और चाल-चलन कुछ भिन्न, ऊंचा और आदर्श होना चाहिए, आत्मिकता से भरपूर होना चाहिए। पौलुस प्रेरित लिखता हैः ‘‘हे भाईयों, मैं तुमसे परमेश्वर की दया स्मरण दिलाकर विनती करता हूं कि अपने शरीरों को जीवित, पवित्र और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओः यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। और इस संसार के सदृश न बनो, परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से, तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए’’ (रोमियों 12:12)। ऐसा क्या है आज के अन्य युवाओं के चाल-चलन में, जिससे हमें बचना है? (अ) नशीली वस्तुओं के सेवन से बचें – नशा मति को हर लेता है, बुद्धि को डस लेता है, विवेक की हत्या कर देता है। नशे में सब ग़लत हो जाता है। आधुनिक युवकों को कई नशीली लतें लग गई हैं – सिगरेट, शराब, नशीला गुटका, ड्रग्स सेवन, जो स्वास्थ्य, चरित्र और बुद्धि को अपंग बना देते हैं। इनके प्रभावजन्य अपराध डींग-शेखी मारना, झगड़ा, अवज्ञा, उपद्रव चोरी, डकैती, हत्या, अपहरण, बलात्कार व्यभिचार हैं जिनके पुरस्कार टी.वी. और एड्स की घातक बीमारियां हैं। इनमें पड़ने का मतलब है अपने स्वास्थ्य, धन, चरित्र और स्वयं तथा परिवार के सुख-शांति-सम्मान का नाश और समाज की ऊर्जा की बर्बादी, नए-नए अपराधों का जन्मा हमारे युवा अपनी युक्तियों पर चलते, इन बुरी बातों पर अन्धानुगमन करते, अपने पक्ष में तर्क-कुतर्क देते हुए कहते हैं – युवावस्था में सब चलता है, इसमें क्या बुराई है, दूसरे भी तो यही कर रहे हैं, यही हमारी स्वतंत्रता है; फिर ठिठाई से कहते हैं – हमें कौन रोकेगा? कौन देखता है? किसमें रोकने का दम है? पर प्रियो, यशायाह भविष्यवक्ता के इन वचनों पर ध्यान देः ‘‘हाय उन पर जो अपनी युक्ति को यहोवा से छिपाने का बड़ा यत्न करते और अपने काम अन्धेरे में करके कहते हैं, हमको कौन देखता है? हमको कौन जानता है?’’ (यशायाह 29:15)। हमारा रचनेवाला परमेश्वर सब जानता है, सब देखता है और अपने द्वारा दी गई इस अनमोल देन – स्वास्थ्य को नाश करने वाले को कदापि न बख्शेगा। (ब) ग़लत संगति से बचें – हमारा परमेश्वर बड़ा अनुग्रहकारी है, उसने हमें एक स्वतंत्र बुद्धि दी है। पर इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि हम अपने लिए कुछ भी चुनें जो हमारे विनाश का कारण बने। ‘‘हे भाईयों, तुम स्वतंत्र होने के लिये बुलाये गये हो परन्तु ऐसा न हो कि यह स्वतंत्रता शारीरिक कामों के लिए अवसर बने’’ (गलतियों 5:13) हमें ‘‘दासत्व (पाप) के जुए में फिर से नहीं जुतना है’’ (गलतियों 5:1)। ‘‘प्रभु यीशु की मृत्यु, उसके पवित्र अनमोल रक्त के बहाये जाने से यह स्वतंत्रता हमें मिली है, तो अब हमें कोई अधिकार नहीं कि हम ऐसी संगति चुने जो हमें पाप के रास्ते पर ले जाए। हमारे शरीर, उसकी लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ाये जा चुके हैं’’ (गलतियों 5:24)। इसलिए ‘‘धोखा न खाना, बुरी संगति अच्छे चरित्र को बिगाड़ देती है’’ (1कुरिन्थियों 15:33)। वचन बताता है ‘‘जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से’’ (भजन संहिता 119:9)। इसलिए हे प्रियो, अपने साथी-मित्रों को चुनने में बड़ी सतर्कता रखें। ‘‘पापियों, दुष्टों के मार्ग पर कदम ही न रखे’’ (भजन संहिता 1:1; नीतिवचन 4:14)। उनके मार्ग बड़े आकर्षक लगते तो हैं पर वचन कहता हैः ‘‘हे मेरे पुत्र, यदि पापी लोग तुझे फुसलाएं, तो उनकी बात न मानना। यदि वे कहें, हमारे संग चल, कि हम हत्या करने के लिये घात लगाएं, हम निर्दोषों की ताक में रहें; हम, अधोलोक की नाईं उनको जीवता, कबर में पड़े हुओं के समान समूचा निगल जाएं; हम को सब प्रकार के अनमोल पदार्थ मिलेंगे, हम अपने घरों को लूट से भर लेंगे; तू हमारा सांझी हो जा, हम सभों का एक ही बटुआ हो, तो, हे मेरे पुत्र तू उनके संग मार्ग में न चलना, वरन् उनकी डगर में पांव भी न धरना; क्योंकि वे बुराई ही करने को दौड़ते हैं, और हत्या करने को फुर्ती करते हैं’’ (नीतिवचन 1:10-16)। उसका अन्त विनाश ही होगा। अतः यीशु को सच्चा साथी मानें, उनके निमंत्रण को स्वीकारें उसके वचन और शिक्षाओं के आशीषित मार्ग पर चलें। शैतानी संगति से बचने के लिए परमेश्वर के पवित्र वचन का बार-बार अध्ययन करें, निरन्तर प्रार्थना करें, प्रभु यीशु को अपना मुक्तिदाता स्वीकार करें, उसके पवित्र भवन को जाया करें, पवित्र लोगों की संगति में रहें; प्रार्थना-सभाओं, बाइबिल अध्ययन और कलीसियाई कार्यों में सहभागिता दें; मसीही युवा-संगठनों, रचनात्मक कार्यों, केम्प व सेमीनार में उत्साह से भाग लें। माता-पिता, शिक्षकों, बुजुर्गो, पास्टर, प्राचीनों, युवा संस्था प्रधानों से सीख-मार्ग दर्शन ले, सेवकाई के क्षेत्र में जाएं। आपका जीवन आनन्दमय, सक्रिय, उपयोगी, परोपकारी और आशीषित हो जावेगा। (स) शरीर के वासनात्मक पापों से बचें – गलतियों 6:8 में लिखा हैः ‘‘जो अपने शरीर के लिए बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा।’’ और उसके पूर्व 5:19-21 में विस्तार से शरीर द्वारा किए जाने वाले उन घृणित कार्यों का वर्णन है, जिन्हें करने से लोग परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे। आज की युवा पीढ़ी अनेक यौन अपराधों से ग्रस्त है। व्यभिचार, परस्त्रीगमन, अप्राकृतिक यौनाचार, बलात्कार, अविवाहित यौन संबंध सरीखे घृणित पापों में लिप्त यह युवा पीढ़ी न केवल परमेश्वर के कठोर न्याय से दंडित होगी, वरन् अपने तथा अन्यों के लिए लज्जा और घृणा का पात्र है। धर्मशास्त्र में वर्णित अनेक घटनाएं चिताती हैं कि कोई भी इन पापों के अपराध से बच नहीं सका। व्यभिचारी राजा दाऊद, सदोम और अमोरा के कुकर्मी निवासी, दाऊद का बलात्कारी पुत्र अम्मोन, शूरवीर पर ग़लत प्रेम संबंध बनाने वाला शिमशोन और ऐसे ही अनेक, परमेश्वर से दंडित हुए। इसलिए आप ‘‘यहोवा का भय मानें, और बुराई से अलग रहें; ऐसा करने से शरीर भला-चंगा और पुष्ट रहेगा’’ (नीतिवचन 3:7,8)। संयमी रहकर अपने पुरूषत्व की रक्षा करें। विवाह-बिना यौन क्रिया महापाप है। इसलिए पराई स्त्री से बचें क्योंकि ‘‘पराई स्त्रियों (वेश्या) का मुंह गहिरा गढ़ा है; जिससे यहोवा क्रोधित होता है, सोई उसमें गिरता है’’ (नीतिवचन 22:14)। ‘‘वेश्यागमन के कारण मनुष्य टुकड़ों का भिखारी हो जाता है, परन्तु व्यभिचारिणी अनमोल जीवन का अहेर का लेती है’’ (नीतिवचन 6:26)। वह ऐसी आग है जो भस्म कर देती है; ‘‘क्या हो सकता है कि कोई अपनी छाती पर आग रख ले; और उसके कपड़े न जलें’’ (नीतिवचन 6:27)। ‘‘उस चोरी के पाप का अन्त मृत्यु है’’ (नीतिवचन 9:17,18)। आज टी.वी., एड्स रोगियों के बढ़ते हुए आंकड़े, और उनके कारणों में, सबसे प्रमुख कारण ग़लत यौन संबंध ही माना जा रहा है। तब क्यों अपने स्वास्थ्य, धन, शक्ति, चरित्र और शांति बर्बाद करने की मूर्खता की जाए; क्यों अपने परिवार और समाज में लज्जा और घृणा के पात्र बना जाए? हमें परिश्रम और संयम से कमाए हुए सबसे बड़े धन पुरूषार्थ का सदुपयोग ही करना है। यह आपके लिए, परिवार के लिए, और पूरे समाज के लिए कल्याणकारी होगा। आपके आस-पास अनेक शैतानी प्रलोभन हैं। सिनेमा, विज्ञापन, टी.वी., वीडियो, टेलीफोन, समाचार-पत्र-पत्रिकाओं, फैशन शो, ग़लत गंदे साहित्य ने मनोरंजन के नाम पर आपको आकर्षित किया है और पाप के रास्ते पर बढ़ाया है। आपको इनके आकर्षण के विरूद्ध संघर्ष करने की दृढ़ता अपने-आप में पैदा करना है। अन्यथा आपके स्वास्थ्य और चरित्र का पतन निश्चित है। मसीही शिक्षा का अनुसरण कर मसीही युवा इन प्रलोभनों से बच सकते हैं और एक आदर्श नैतिक मापदण्ड बनाए रख सकते हैं। अंत में, फिर वचनानुसार, आपसे कहना हैः ‘‘अपनी जवानी के दिनों में अपने सृजनहार को स्मरण रख’’ (सभोपदेशक 12:1)। आप निश्चित ही स्वतंत्र हैं कि अपनी ज़िन्दगी कैसे ही व्यतीत करें, अपने शरीर का कैसा भी उपयोग करें परन्तु वचन फिर चिताता हैः ‘‘इन सब बातों के लिये परमेश्वर तेरा न्याय करेगा’’ (सभोपदेशक 11:9)। एस.के. सैमुएल
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| Last Updated on Thursday, 20 March 2008 16:25 |



