दैनिक मनन

  • तुम्‍हारे विश्‍वास को देखकर
    तुम्‍हारे विश्‍वास को देखकर‘‘लोग एक झोले के मारे हुए को चार मनुष्‍यों उठवाकर उसके (यीशु) पास ले आए’’। (मरकुस 2:1-12)प्रभु यीशु कफरनहूम नगर में किसी घर में था और कुछ मनुष्‍य एक लकवे के रोगी को उसके...

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ईश्‍वर को निरन्‍तर हमारा ध्‍यान है PDF Print E-mail
Written by डॉ. श्रीमती शीला लाल   
Friday, 22 September 2006 16:46

‘‘क्‍या यह हो सकता है कि कोई माता अपने दूध मुंहे बच्‍चे को भूल जाए या कोई अपने ही गर्भ से जन्‍मे पुत्र पर दया न करे चाहे ये भूल जाएं तो भूल जाएं परन्‍तु मैं तुझे नहीं भूलूंगा। देख मैंने तेरा नाम (चित्र) अपनी हथेली पर खोद कर लिख लिया है तेरी शहरपनाह निरन्‍तर मेरे सामने है।’’ यशायाह 49:15-16

माता का बच्‍चे के प्रति प्रेम विश्‍व प्रसिद्ध है माता के त्‍याग व प्रेम की मिसालें दी जाती हैं उस पर न जाने कितने कृतियों साहित्‍यकारों ने रचनायें लिखी हैं और यहॉं इस संदर्भ को पढ़ें तो लगता है कि यह तो बड़ी अजीब सी बात है कि जन्‍माने वाली माता हमें भूल जाये बचपन में सुनी एक घटना याद आती है जब एक पारिवारिक मसीही कैम्‍प में युवाओं के सत्र में पास्‍टर साहब यही बात समझाने का प्रयास कर रहे थे कि माता पिता का आदर करना है यह तो उनकी चिन्‍ता फिक्र, देखभाल करना है इसका तो हमें ईश्‍वर ने आदेश दिया है प्रभु यीशु ने अपने जीवन से इसका उदाहरण रखा है लेकिन फिर बाइबिल में यह भी लिखा है कि जो कोई अपने माता पिता या पत्‍नी और बच्‍चों को प्रभु से अधिक प्रिय जाने वह मेरा, चेला कहलाने के योग्‍य नहीं तो यह क्‍या बात हुई? बात स्‍पष्‍ट है ईश्‍वर हमारे जीवन में प्रथम स्‍थान चाहते हैं हमारा सम्‍पूर्ण Devotion और Dedication चाहते है यदि सांसारिक संबंधो में फंसकर हमारे पास ईश्‍वर के लिये समय नहीं तो ईश्‍वर को यह मंजूर नहीं।

कैम्‍प में इस विषय पर चर्चा करते हुए पास्‍टर साहब ने युवा से कहा चलो तुम्‍हारे लिए Experiment करते है तुम मृतक से जमीन पर गिर जाओ मैं तुम्‍हारे परिवार के लोगों को बुलाकर कुछ प्रश्‍न करूंगा उनके जबाव सुनना। पास्‍टर साहब से माता पिता युवा की नव विवाहिता पत्‍नी जवान भाई सभी को बुलाया कहा इस युवा की सांप के डसने से मृत्‍यु हो गयी है डॉ. को बुलाया था उन्‍होंने यह ज़हर दिया है जो यहॉ एक कटोरे में है यह उस ज़हर का तोड़ है उन्‍होंने कहा है कि यदि कोई ये ज़हर मरने वाले का हाथ पकड़कर पी ले तो मरा हुआ व्‍यक्ति जीवित हो जायेगा और ये ज़हर का कटोरा पीने वाले व्‍यक्ति की उसके स्‍थान पर मृत्‍यु हो जायेगी। पिताजी बोले मैं तो अभी 50 ही वर्ष का हूं पूर्ण स्‍वस्‍थ्‍य हूं घर की सारी ज़ि‍म्‍मेदारी मेरे ऊपर है ये बेटा तो चला गया अब मुझे कुछ हो जाये इसकी रिस्‍क मैं नही ले सकता।

मॉ बोली मेरे कलेजे का एक टुकड़ा चला गया पर दूसरा बेटा अभी जीवित है पढ़ रहा है मैं उसे देखकर ही जी लूंगी मैं न रही तो घर कैसे चलेगा।
पत्‍नी बोली मेरी अभी उम्र ही क्‍या है ये बहुत अच्‍छे पति थे लेकिन जीवन रहा तो ईश्‍वर मुझे ऐसा ही दूसरा पति दे देगे अभी तो मेरे हंसने खेलेने के दिन हैं।
भाई बोला मैं पढ़ने में, खेलने में होशियार मुझे तो कई रिकार्ड बनाने है जीवन के बहुत से स्‍वप्‍न हैं उन्‍हें अभी से कैसे समाप्‍त कर दूं ज़ि‍न्‍दगी के कुछ मजे तो ले लूं।

तब पास्‍टर ने कहा बेटे देख ली यह सांसारिक दुनिया अब उठ जाओ सभी पारिवारिक सदस्‍य बहुत शर्मिन्‍दा हुए लेकिन यही वास्‍तविकता है। सब साथ छोड़ देते हैं लेकिन ईश्‍वर की प्रतिज्ञा है मैं न तुझे कभी छोडूंगा न त्‍यागूंगा अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे संभाले रहूंगा। हमारे नाम उसकी हथेली पर और हम उसकी आंखों और हृदय में बने हैं वह हमारा ऐसा परमेश्‍वर है जो कहता है  ‘‘सुन तेरा रक्षक न ऊंघेगा और न सोयेगा।’’ यहोवा तेरा दृढ़ गढ़ है संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक है न तो दिन को धूप से न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी।
जवान सिंहों को घटी हो और वे भूखे रह जायें लेकिन यहोवा के दर्शन के खोजियों को कभी किसी भली वस्‍तु की घटी न होगी। परखकर देखो यहोवा कैसा भला है।’’

युवा स्‍वयं Experiment करने में विश्‍वास रखते हैं तो ईश्‍वर को भी परखें अन्‍य लोगों से, जगहों से तो धोखे मिलेंगे लेकिन आपने ईश्‍वर की ओर हाथ बढ़ाया तो वह उसे दृढ़ता से थाम लेगा और न आपको भटकने देगा न अकेला छोड़ेगा।

‘‘हम शहरपनाह निरन्‍तर उसकी दृष्टि में है’’ हमारी सीमा रेखा कैसी है, हमारा संयम, धैर्य, परीक्षाओं में स्थिर रहना, विरोधी शैतान जब हमारी शहरपनाह में सेंध लगाना चाहता है, जब मित्र संबंधी या अभिलाषा जन्‍य सोच के तहत हमारे स्‍थापित शहरपनाह यानि ईश्‍वरीय सीमाओं के खिड़की दरवाजों से भीतर प्रवेश करता है तब उसे भी ईश्‍वर देख रहा है उसकी दृष्टि से कुछ भी छुपा नहीं है।
लेकिन ईश्‍वर ने मनुष्‍य को अपने ईश्‍वरीय स्‍वरूप में बनाया है उसे विवेक बुद्धि‍ और ज्ञान दिया है इसलिये वे चाहते है हम सही चुनाव करें और इन ईश्‍वर प्रदत्‍त गुणों का सही प्रयोग करें क्‍योंकि अनन्‍तः हमारे अपने चुनाव ही ईश्‍वर के अनुग्रह को प्रभावित करते हैं जिसके लेखे हमारे लिये स्‍वर्ग और नर्क का अंतिम और अनन्‍त जीवन प्राप्‍त होता है।

ईश्‍वर का तो पूर्ण ध्‍यान हमारी ओर है उसका अवर्णीय प्रेम है, उसकी प्रतिज्ञायें है लेकिन उसकी आज्ञायें भी हैं। जिनका हमें पालन करना है और ये आज्ञायें सहज हैं क्‍योंकि उसका जुआ सरल है और पाप का जुआ बोझिल जिसे प्रभु यीशु ने सभो की खातिर क्रूस पर टांग दिया उसके बलिदान को अपने जीवन से व्‍यर्थ न जाने दें।

उसे निरन्‍तर हमारा ध्‍यान है काश कि हम भी निरन्‍तर उसका ध्‍यान कर अपने जीवन के चुनाव में करें, निर्णय लें, आगे बढ़ें और उसके लिए महिमा का कारण बनें जिससे हमें बहुतायत का जीवन मिले और हम तथा हमारे सम्‍पर्क में आने वाले आशीषित हों।

डॉ. श्रीमती शीला लाल

Last Updated on Thursday, 20 March 2008 18:26
 
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